विश्व पर्यावरण दिवस 2026: लखनऊ में सावन ग्रुप का भव्य आयोजन; विशेषज्ञों ने कहा— वैज्ञानिक समझ और आध्यात्मिक जागरूकता के समन्वय से बचेगा पर्यावरण
लखनऊ, 09 जून 2026: वैश्विक स्तर पर पैर पसार रहे जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रदूषण के संकट से निपटने के संकल्प के साथ सावन ग्रुप (SAWEN GROUP) की सामाजिक एवं जन-जागरूकता शाखा— सावेन पर्यावरण चेतना फेडरेशन (SPCF) द्वारा लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित मुख्य कार्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर एक भव्य एवं विचारोत्तेजक कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। भारत के कई राज्यों सहित तुर्की और इंडोनेशिया जैसे देशों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत सावन ग्रुप के इस गरिमामयी कार्यक्रम में देश-विदेश के जाने-माने पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, इंजीनियरों, विधि विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
इस वर्ष कार्यक्रम का आयोजन “हमारा पर्यावरण, हमारी जिम्मेदारी: विज्ञान, परीक्षण, जागरूकता एवं शिक्षा के माध्यम से सतत विकास की ओर” मुख्य विषय (Theme) और वैश्विक सह-विषय “प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए (#NowForClimate)” के अंतर्गत किया गया।
पर्यावरण प्रदूषण केवल पारिस्थितिक संकट नहीं, बल्कि 'आध्यात्मिक असंतुलन' है: डॉ. आर.के. सिंह
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सावन ग्रुप के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) डॉ. आर.के. सिंह ने अपने उद्घाटन भाषण में विश्व पर्यावरण दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (स्टॉकहोम मानव पर्यावरण सम्मेलन - UNCHE) पर प्रकाश डाला। उन्होंने सावन ग्रुप के मूल दर्शन “भीतर हरियाली, तभी बाहर खुशहाली” को रेखांकित करते हुए एक बेहद गहरा विचार साझा किया।
डॉ. सिंह ने कहा, "जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण को केवल विज्ञान या टेक्नोलॉजी के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। पर्यावरणीय क्षरण के मूल कारण मानवीय चेतना के पतन, असंतुलित जीवन शैली, अंधाधुंध उपभोक्तावाद और प्रकृति से बढ़ती दूरी में छिपे हैं। वास्तव में, पर्यावरण प्रदूषण केवल एक पारिस्थितिक संकट नहीं है, बल्कि यह मानव के आध्यात्मिक असंतुलन की बाहरी अभिव्यक्ति है।"
उन्होंने भारतीय दर्शन के पंचमहाभूतों (आकाश, वायु, अग्नि, जल एवं पृथ्वी) और उपनिषदों की शिक्षाओं का संदर्भ देते हुए याद दिलाया कि प्रकृति और मानव अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही सार्वभौमिक अस्तित्व का हिस्सा हैं। इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना हमारा सामाजिक ही नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक कर्तव्य भी है।
इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए सावन ग्रुप के मेंटर डॉ. सचिन तिवारी ने कहा कि वास्तविक पर्यावरण संरक्षण केवल 'वृक्षारोपण' से नहीं, बल्कि “विचारारोपण” (जिम्मेदार विचारों की बुआई) से शुरू होता है। उन्होंने सनातन परंपरा और श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं को मृदा संरक्षण और संयमित उपभोग का अचूक मार्ग बताया।
WMO के डराने वाले आंकड़े: 1.43°C तक बढ़ा वैश्विक तापमान
चर्चा के दौरान डॉ. आर.के. सिंह ने विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के हालिया और चिंताजनक वैज्ञानिक आंकड़े भी प्रस्तुत किए:
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तापमान में वृद्धि: वर्ष 2023–2025 के दौरान वैश्विक औसत तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर की तुलना में लगभग 1.43 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है, जो बेहद संवेदनशील है।
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कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का स्तर: वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता औद्योगिक क्रांति से पूर्व के 280 पीपीएम (ppm) से बढ़कर अब 420 पीपीएम तक पहुंच गई है, जो सीधे तौर पर 50 प्रतिशत की भारी वृद्धि को दर्शाती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक गर्मी, बेमौसम और अनियमित बारिश, बाढ़, सूखा और हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बादल फटने की घटनाएं इसी मानवीय हस्तक्षेप और अनियोजित शहरीकरण का नतीजा हैं।
जल संरक्षण और आधुनिक ग्रीन इंजीनियरिंग के व्यावहारिक समाधान
कॉन्क्लेव में केवल समस्याओं पर ही बात नहीं हुई, बल्कि पर्यावरण को बचाने के लिए कई बेहतरीन तकनीकी और व्यावहारिक समाधान भी पेश किए गए:
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शहरी क्षेत्रों में जल सुरक्षा: श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह (निदेशक, व्यवसाय विकास) ने शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में वर्षा जल संचयन (RWH), ग्राउंडवाटर रिचार्ज संरचनाओं और दोहरी पाइपलाइन प्रणाली (Dual Plumbing) को अनिवार्य रूप से अपनाने पर जोर दिया, ताकि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के उपचारित जल का उपयोग बागवानी, निर्माण कार्यों और वाहन धुलाई में किया जा सके।
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इको-फ्रेंडली आर्किटेक्चर: मुख्य अतिथि और सुप्रसिद्ध वास्तुकार प्रो. (आर्क.) सुनील कुमार श्रीवास्तव ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचार को उद्धृत करते हुए कहा कि “प्रकृति हर व्यक्ति की जरूरत पूरी कर सकती है, लालच की नहीं।” उन्होंने बिजली की खपत को कम करने के लिए प्राकृतिक प्रकाश और क्रॉस-वेंटिलेशन पर आधारित भवन डिजाइनों को बढ़ावा देने की अपील की।
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वैज्ञानिक डेटा और आधुनिक तकनीक: डॉ. अर्पिता सिन्हा ने सटीक पर्यावरणीय निर्णयों के लिए प्रयोगशालाओं के विश्वसनीय आंकड़ों को महत्वपूर्ण बताया, वहीं तकनीकी निदेशक इंजीनियर रंजन सिंह कलहंस ने औद्योगिक प्रदूषण को न्यूनतम करने के लिए अत्याधुनिक ग्रीन इंजीनियरिंग सॉल्यूशंस के एकीकरण पर बल दिया।
"यूज़ एंड थ्रो" छोड़ें और लें संकल्प— 'मेरा कचरा, मेरी जिम्मेदारी'
सावन ग्रुप के चेयरमैन ने समाज से अपील की कि वे आधुनिक "यूज़ एंड थ्रो" (सामान इस्तेमाल करो और फेंको) की संस्कृति को हमेशा के लिए त्याग दें और इसके स्थान पर “यूज़, रीयूज़, रिस्टोर एंड ग्रो” की नई जीवनशैली अपनाएं। इसके साथ ही उन्होंने हर नागरिक से “मेरा कचरा, मेरी जिम्मेदारी” का संकल्प लेने का आग्रह किया।
युवा पीढ़ी की वैज्ञानिक ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हुए सावेन प्रोजेक्ट्स एंड लेबोरेट्रीज के प्रशिक्षु रसायनज्ञ डॉ. पुलकित ने अनूठे और व्यावहारिक सुझाव दिए; जैसे— बुके के स्थान पर जीवित पौधे उपहार में देना, बीज वितरण और इनडोर पौधरोपण। संवाद सत्र के दौरान टीम सदस्य दीपांशी द्वारा ई-कचरे (E-Waste) पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए डॉ. सिंह ने ई-कचरा प्रबंधन के कड़े नियमों और जिम्मेदार निस्तारण की कानूनी व्यवस्था के बारे में विस्तार से समझाया।
सामूहिक 'पर्यावरण संकल्प-पत्र' के साथ समापन
इस गरिमामयी कार्यक्रम में पर्यावरण-अनुकूल आतिथ्य की एक अनूठी मिसाल पेश की गई, जहां सभी अतिथियों का स्वागत पारंपरिक बुके (फूलों के गुच्छों) के स्थान पर सजीव पौधों और आकर्षक सिरेमिक गमलों से किया गया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में उपस्थित सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने एक सामूहिक 'पर्यावरण संकल्प-पत्र' पर हस्ताक्षर किए। इस पत्र के माध्यम से सभी ने अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने, जल और मृदा संरक्षण करने, और पर्यावरण दूत (Environmental Ambassadors) के रूप में समाज को जागरूक करने की सामूहिक शपथ ली।
डॉ. आर.के. सिंह ने अपने समापन संदेश में कहा— “हमारे विचार पवित्र हों और हमारे कर्म हरित हों; यही पर्यावरण संरक्षण का वास्तविक स्वरूप है। पृथ्वी को बचाने का सबसे सरल उपाय है— हृदय में संवेदना, जीवन में सादगी और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता।”
