World Environment Day: लखनऊ में बोले लोहम के निदेशक तरुण सिंघल— 'सतत औद्योगिक विकास का बड़ा केंद्र बन रहा है उत्तर प्रदेश'

World Environment Day: Tarun Singhal, Director of Lohum, speaks in Lucknow—"Uttar Pradesh is emerging as a major hub for sustainable industrial development."
 
World Environment Day: लखनऊ में बोले लोहम के निदेशक तरुण सिंघल— 'सतत औद्योगिक विकास का बड़ा केंद्र बन रहा है उत्तर प्रदेश'

लखनऊ, 08 जून 2026:

विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर राजधानी लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन ‘एक पेड़ माँ के नाम’ में भारत की सबसे बड़ी विविधीकृत सतत क्रिटिकल मिनरल्स एवं एडवांस्ड मटेरियल्स उत्पादक कंपनी लोहम (LOHUM) ने अपने अत्याधुनिक सर्कुलर इकोनॉमी आधारित समाधानों का शानदार प्रदर्शन किया।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) तथा उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस उच्च स्तरीय कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, जलवायु लचीलापन और सतत औद्योगिक विकास के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को देश के सामने लाना था।

उत्तर प्रदेश की दूरदर्शी नीतियां निवेश के लिए अनुकूल: तरुण सिंघल

सम्मेलन के दौरान लोहम के निदेशक तरुण सिंघल ने उत्तर प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीतियों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा हम उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य सरकार के पर्यावरण संरक्षण, सर्कुलर इकोनॉमी तथा सतत औद्योगिक विकास के प्रति मजबूत संकल्प की सराहना करते हैं। राज्य की दूरदर्शी नीतियाँ लोहम जैसी अग्रणी कंपनियों को निवेश, उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों की रिकवरी और रीसाइक्लिंग के लिए एक बेहद सुरक्षित और अनुकूल वातावरण प्रदान कर रही हैं। इससे आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को एक साथ बढ़ावा मिल रहा है। उत्तर प्रदेश भविष्य के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के एक महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है।"

स्वदेशी और सर्कुलर आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की बढ़ती जरूरत

भारत इस समय तेजी से स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) आधारित अर्थव्यवस्था की ओर कदम बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए केवल रिन्यूएबल एनर्जी का विस्तार करना ही काफी नहीं है, बल्कि निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की स्वदेशी और सर्कुलर आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण भी बेहद अनिवार्य है:

  • विद्युतिकरण और ऊर्जा भंडारण (Energy Storage)

  • ई-मोबिलिटी (E-Mobility/EVs) और उन्नत विनिर्माण

  • रणनीतिक और अगली पीढ़ी की रक्षा व नागरिक प्रौद्योगिकियां

उत्तर प्रदेश में सतत औद्योगिकीकरण (Sustainable Industrialization) और पर्यावरण-अनुकूल विकास पर दिया जा रहा मौजूदा जोर ऐसे उद्योगों के फलने-फूलने के लिए सबसे मुफीद माहौल तैयार कर रहा है।

प्रदर्शनी में लोहम ने पेश किए ये आधुनिक 'सतत उत्पाद'

समारोह के तकनीकी सत्र और प्रदर्शनी के दौरान लोहम ने अपनी उन्नत रिकवरी, रिफाइनिंग और अत्याधुनिक प्रोसेसिंग तकनीकों से विकसित कई सतत उत्पादों (Sustainable Products) का सजीव प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षण निम्नलिखित सामग्रियाँ रहीं, जो बैटरियों, मैग्नेट्स, मोबिलिटी सिस्टम्स और इलेक्ट्रॉनिक्स की आधारशिला हैं:

  1. रिफाइंड मिनरल साल्ट्स और शुद्ध धातुएँ

  2. कैथोड एक्टिव मटेरियल (CAM)

  3. मिक्स्ड रेयर अर्थ ऑक्साइड्स

  4. रिकवर्ड कार्बन ब्लैक और उन्नत ग्रेफाइट

आत्मनिर्भर भारत और संसाधन सुरक्षा को मिलेगी गति

लोहम की इस प्रदर्शनी ने यह पूरी तरह सिद्ध कर दिया कि अपनी जीवन-चक्र (Life-cycle) को पूरा कर चुके अनुपयोगी उत्पादों और औद्योगिक अपशिष्टों (Industrial Waste) से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति करना आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टियों से कितना गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

रीसाइक्लिंग और सर्कुलर मटेरियल उत्पादन के माध्यम से न केवल देश की संसाधन सुरक्षा सुदृढ़ होगी, बल्कि विदेशों से होने वाले महंगे आयात पर भारत की निर्भरता भी काफी हद तक कम होगी। उत्तर प्रदेश में लोहम की ये पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियां देश के 'आत्मनिर्भर भारत' और नेट-जीरो (Net-Zero) लक्ष्यों को गति देने में एक मील का पत्थर साबित हो रही हैं।

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