विश्व डाक दिवस: डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के गौरवशाली इतिहास को डाक विभाग ने दिया था विशेष सम्मान

103 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा में दर्ज है एक यादगार उपलब्धि, 2009 में जारी हुआ था संघ के 87वें स्थापना दिवस पर विशेष डाक आवरण
 
2009 में जारी हुआ था विशेष डाक आवरण  इं. अहमद मुबीन के अनुसार, 24 जनवरी 2009 को संघ के 87वें स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय डाक विभाग के उत्तर प्रदेश परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल की ओर से एक विशेष डाक आवरण (स्पेशल कवर) जारी किया गया था। इस आवरण पर डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के गौरवशाली इतिहास और स्थापना के 87 वर्ष पूरे होने से संबंधित विवरण अंकित था।  यह विशेष आवरण संगठन की ऐतिहासिक यात्रा को संरक्षित करने के साथ-साथ उसके योगदान को सम्मानित करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है।  संघ भवन में बातचीत के दौरान मिली जानकारी  इं. अहमद मुबीन ने बताया कि 22 सितंबर 2026 को लखनऊ स्थित संघ भवन में प्रवास के दौरान उन्हें इस ऐतिहासिक डाक आवरण को देखने का अवसर मिला। इस दौरान उनकी बातचीत संघ के प्रांतीय अध्यक्ष इं. एन. डी. द्विवेदी और वरिष्ठ प्रांतीय उपाध्यक्ष इं. श्रवण कुमार यादव से हुई। इसी संवाद के दौरान उन्हें संगठन के इतिहास से जुड़ी इस विशेष उपलब्धि की जानकारी प्राप्त हुई।  विश्व डाक दिवस के अवसर पर उन्होंने इस ऐतिहासिक प्रसंग को साझा करते हुए कहा कि ऐसे दस्तावेज किसी भी संगठन की विरासत, उपलब्धियों और गौरवशाली परंपरा को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  87वें स्थापना दिवस पर ये पदाधिकारी थे मौजूद  संघ के 87वें स्थापना दिवस के समय इं. हरि किशोर तिवारी प्रांतीय अध्यक्ष और इं. एल. एन. सचान प्रांतीय पदाधिकारी के रूप में संगठन से जुड़े थे। विशेष डाक आवरण का जारी होना संघ के इतिहास की उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल है।  विश्व डाक दिवस पर यह प्रसंग याद दिलाता है कि डाक विभाग केवल संदेशों के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं, बल्कि ऐतिहासिक घटनाओं, संस्थाओं और सामाजिक योगदान को सहेजने का भी महत्वपूर्ण साधन रहा है।  प्रस्तुति एवं स्क्रिप्ट: इं. अहमद मुबीन पद: जनपद सचिव, डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश, शाहजहांपुर  विश्व डाक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!  “ख़तों में आज भी वो एहसास ज़िंदा है, डाकिए के हाथों में रिश्तों का विश्वास ज़िंदा है। दूरियों को मिटाकर दिलों को जोड़ती है डाक, हर संदेश में अपनों का प्यार ज़िंदा है।”

लखनऊ। ख़तों में आज भी भावनाओं की खुशबू बसी है और डाकिए के हाथों में अपनों के संदेशों का विश्वास कायम है। डिजिटल दौर में भी डाक व्यवस्था का अपना ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व है। विश्व डाक दिवस के अवसर पर डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश के गौरवशाली इतिहास से जुड़ा एक यादगार प्रसंग सामने आया है। भारतीय डाक विभाग ने वर्ष 2009 में संघ के 87वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक विशेष डाक आवरण जारी कर संगठन की ऐतिहासिक यात्रा को सम्मान दिया था।

डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश की स्थापना के 103 वर्ष पूरे हो चुके हैं। संगठन के इतिहास से जुड़ी इस महत्वपूर्ण जानकारी को संघ के जनपद सचिव, शाहजहांपुर, इं. अहमद मुबीन ने विश्व डाक दिवस के अवसर पर साझा किया है।

2009 में जारी हुआ था विशेष डाक आवरण

इं. अहमद मुबीन के अनुसार, 24 जनवरी 2009 को संघ के 87वें स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय डाक विभाग के उत्तर प्रदेश परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल की ओर से एक विशेष डाक आवरण (स्पेशल कवर) जारी किया गया था। इस आवरण पर डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के गौरवशाली इतिहास और स्थापना के 87 वर्ष पूरे होने से संबंधित विवरण अंकित था।यह विशेष आवरण संगठन की ऐतिहासिक यात्रा को संरक्षित करने के साथ-साथ उसके योगदान को सम्मानित करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

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संघ भवन में बातचीत के दौरान मिली जानकारी

इं. अहमद मुबीन ने बताया कि 22 सितंबर 2026 को लखनऊ स्थित संघ भवन में प्रवास के दौरान उन्हें इस ऐतिहासिक डाक आवरण को देखने का अवसर मिला। इस दौरान उनकी बातचीत संघ के प्रांतीय अध्यक्ष इं. एन. डी. द्विवेदी और वरिष्ठ प्रांतीय उपाध्यक्ष इं. श्रवण कुमार यादव से हुई। इसी संवाद के दौरान उन्हें संगठन के इतिहास से जुड़ी इस विशेष उपलब्धि की जानकारी प्राप्त हुई।

विश्व डाक दिवस के अवसर पर उन्होंने इस ऐतिहासिक प्रसंग को साझा करते हुए कहा कि ऐसे दस्तावेज किसी भी संगठन की विरासत, उपलब्धियों और गौरवशाली परंपरा को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

87वें स्थापना दिवस पर ये पदाधिकारी थे मौजूद

संघ के 87वें स्थापना दिवस के समय इं. हरि किशोर तिवारी प्रांतीय अध्यक्ष और इं. एल. एन. सचान प्रांतीय पदाधिकारी के रूप में संगठन से जुड़े थे। विशेष डाक आवरण का जारी होना संघ के इतिहास की उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल है।

विश्व डाक दिवस पर यह प्रसंग याद दिलाता है कि डाक विभाग केवल संदेशों के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं, बल्कि ऐतिहासिक घटनाओं, संस्थाओं और सामाजिक योगदान को सहेजने का भी महत्वपूर्ण साधन रहा है।

प्रस्तुति एवं स्क्रिप्ट: इं. अहमद मुबीन
पद: जनपद सचिव, डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश, शाहजहांपुर

विश्व डाक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!

“ख़तों में आज भी वो एहसास ज़िंदा है,
डाकिए के हाथों में रिश्तों का विश्वास ज़िंदा है।
दूरियों को मिटाकर दिलों को जोड़ती है डाक,
हर संदेश में अपनों का प्यार ज़िंदा है।”

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