विश्व रेबीज दिवस: कुत्ता काटे या चाटे तो 15 मिनट तक करें घाव की सफाई, वैक्सीन में देरी न करें
लखनऊ, 28 सितंबर 2026। विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर आयोजित वेबिनार में फार्मेसिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील यादव ने लोगों से पशुओं के काटने, खरोंचने या खुले घाव पर चाटने की स्थिति में लापरवाही न बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि संभावित रेबीज संक्रमण की स्थिति में घाव को तुरंत बहते पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए और इसके बाद बिना देरी किए स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। WHO भी संभावित रेबीज एक्सपोजर के बाद तत्काल घाव की सफाई और जरूरत के अनुसार पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफाइलेक्सिस (PEP) की सलाह देता है।
इस वर्ष विश्व रेबीज दिवस की थीम ‘Stronger Together’ यानी ‘एक साथ मजबूत’ है। WHO के अनुसार यह थीम मानव स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा सेवाओं, समुदायों, स्वास्थ्यकर्मियों और सरकारों के बीच समन्वित प्रयासों के महत्व को रेखांकित करती है।
काटे-चाटे श्वान के दुहू भांति विपरीत’ का संदेश
सुनील यादव ने कहा कि “काटे-चाटे श्वान के दुहू भांति विपरीत” जैसी पुरानी कहावत अपने स्थान पर है, लेकिन कुत्ते के काटने के बाद इलाज को लेकर लोगों में आज भी कई गलत धारणाएं मौजूद हैं।उन्होंने कहा कि लोग अक्सर इंजेक्शन के डर के कारण इलाज में देरी करते हैं, जबकि ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी संभावित रेबीज एक्सपोजर के बाद इंजेक्शन के डर से उपचार टालने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
WHO के अनुसार रेबीज के लक्षण विकसित होने के बाद बीमारी लगभग हमेशा घातक होती है, लेकिन समय पर उचित PEP से इसे रोका जा सकता है। PEP में घाव की अच्छी तरह सफाई, रेबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन या अन्य अनुशंसित उपचार शामिल हो सकते हैं।
रेबीज क्या है और कितना गंभीर है?
रेबीज एक वायरल जूनोटिक बीमारी है, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। WHO के अनुसार, दुनिया में हर साल अनुमानित 59 हजार लोगों की रेबीज से मृत्यु होती है और मानव रेबीज के लगभग 99 प्रतिशत मामले संक्रमित कुत्तों से होने वाले संक्रमण से जुड़े हैं। बच्चों पर इसका प्रभाव भी अधिक है और 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे कुल मामलों में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं।
रेबीज मुख्य रूप से संक्रमित जानवर के काटने या खरोंचने से फैलता है। संक्रमित जानवर की लार का टूटे हुए त्वचा या आंख-मुंह जैसी श्लेष्म झिल्ली से संपर्क भी जोखिम पैदा कर सकता है। कुत्ते इसके संक्रमण का सबसे प्रमुख स्रोत हैं, हालांकि अन्य स्तनधारी जानवर भी संक्रमण फैला सकते हैं।
रेबीज के प्रमुख रूप
WHO के अनुसार बीमारी के दो प्रमुख नैदानिक रूप देखे जाते हैं—
फ्यूरियस रेबीज: इसमें अत्यधिक उत्तेजना, असामान्य व्यवहार, भ्रम या मतिभ्रम, समन्वय में परेशानी तथा पानी और हवा से संबंधित असामान्य प्रतिक्रियाएं जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
पैरालिटिक रेबीज: इस रूप में मांसपेशियों में धीरे-धीरे कमजोरी और लकवे की स्थिति विकसित हो सकती है। आगे चलकर कोमा जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। WHO के अनुसार इस रूप का कई बार सही समय पर निदान नहीं हो पाता, जिससे बीमारी की रिपोर्टिंग प्रभावित हो सकती है।
कुत्ता या अन्य जानवर काट ले तो तुरंत क्या करें?
सुनील यादव ने लोगों को प्राथमिक तौर पर कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की सलाह दी। WHO के दिशा-निर्देशों के अनुसार:
- घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं।
- इसके बाद जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में चिकित्सकीय मूल्यांकन कराएं।
- चिकित्सक के निर्देश के अनुसार रेबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर इम्यूनोग्लोबुलिन/अन्य PEP उपचार लें।
- घाव पर मिर्च, पौधों का रस, तेजाब, क्षार या अन्य जलन पैदा करने वाली चीजें न लगाएं।
- घाव को बिना चिकित्सकीय सलाह के कसकर पट्टी से न ढकें।
- टांके की जरूरत होने पर यह निर्णय स्वास्थ्यकर्मी द्वारा घाव की स्थिति और संक्रमण के जोखिम को देखकर लिया जाना चाहिए।
WHO के अनुसार संभावित रेबीज एक्सपोजर को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर काटने, खरोंचने या टूटी त्वचा/म्यूकोसा पर संक्रमित जानवर की लार लगने की स्थिति में तत्काल चिकित्सा मूल्यांकन जरूरी है।
वैक्सीनेशन को लेकर डरने की जरूरत नहीं
सुनील यादव ने कहा कि लोगों के बीच आज भी यह धारणा है कि कुत्ते के काटने पर पेट में बड़े-बड़े इंजेक्शन लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को इस पुराने मिथक के कारण उपचार से बचना नहीं चाहिए और आधुनिक रेबीज वैक्सीनेशन की प्रक्रिया के बारे में चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
WHO के अनुसार रेबीज वैक्सीन का उपयोग एक्सपोजर के बाद संक्रमण को रोकने के लिए किया जाता है और कई परिस्थितियों में इंट्राडर्मल वैक्सीनेशन का उपयोग भी किया जाता है। हालांकि वैक्सीन का मार्ग और डोजिंग शेड्यूल व्यक्ति की स्थिति, एक्सपोजर और स्थानीय राष्ट्रीय गाइडलाइन के अनुसार स्वास्थ्यकर्मी तय करते हैं।
फार्मेसिस्ट फेडरेशन चला रहा जागरूकता अभियान
सुनील यादव ने बताया कि फार्मेसिस्ट फेडरेशन की ओर से फार्मेसिस्टों के माध्यम से आम लोगों को रेबीज से बचाव और पशु काटने के बाद तत्काल उपचार के प्रति जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फेडरेशन में विभिन्न क्षेत्रों के फार्मेसिस्टों के साथ पशुपालन विभाग से जुड़े फार्मेसिस्ट भी समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि रेबीज की रोकथाम के लिए केवल मानव उपचार पर्याप्त नहीं है। संक्रमित कुत्तों से संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए कुत्तों का टीकाकरण, जिम्मेदार पशु देखभाल, जागरूकता और समय पर मानव उपचार सभी जरूरी हैं। WHO भी रेबीज उन्मूलन के लिए मानव और पशु स्वास्थ्य के बीच समन्वित ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण पर जोर देता है।
बच्चों को लेकर विशेष सावधानी जरूरी
WHO के अनुसार रेबीज का बोझ बच्चों पर भी अधिक पड़ता है। इसलिए अभिभावकों को बच्चों को आवारा या अपरिचित जानवरों से दूरी बनाए रखने की जानकारी देनी चाहिए और उन्हें बिना निगरानी के किसी जानवर के साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
सुनील यादव ने लोगों से अपील की कि यदि वे कुत्ता पालते हैं तो उसका नियमित टीकाकरण कराएं। किसी जानवर के काटने या खरोंचने की घटना को सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें और तत्काल चिकित्सकीय सलाह लें।
वेबिनार को प्रोफेसर डॉ. प्रकाश वी. दीवान, डॉ. हरलोकेश नारायण, प्रो. मनोज यादव, डॉ. विष्णु, डॉ. वंदना, डॉ. अभिषेक, अशोक कुमार, आदेश कृष्ण, अवधेश और अजीत सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। सभी ने लोगों से रेबीज की रोकथाम के लिए जागरूक रहने और संभावित एक्सपोजर की स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता लेने की अपील की।
रेबीज एक्सपोजर की स्थिति में वैक्सीन या इम्यूनोग्लोबुलिन की जरूरत और उसका शेड्यूल व्यक्ति की स्थिति तथा एक्सपोजर की श्रेणी के अनुसार चिकित्सक/स्वास्थ्यकर्मी तय करते हैं। किसी भी संभावित एक्सपोजर में उपचार लेने में देरी न करें।
