विश्व थायराइड दिवस 2026: थायराइड की अनदेखी पड़ सकती है भारी, जानें लक्षण और दवा लेने का सही तरीका
लखनऊ: भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव और खान-पान में असंतुलन के कारण आज थायराइड एक साइलेंट किलर की तरह हमारे समाज, खासकर महिलाओं में पैर पसार रहा है। 'विश्व थायराइड दिवस' के मौके पर मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ के एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी विभाग द्वारा लोगों को इस बीमारी के प्रति सचेत करने के लिए एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया।
इस कार्यक्रम में आए लोगों को विशेषज्ञों ने थायराइड के प्रकार, उनके बदलते लक्षण, गले की गांठों के खतरे और इससे बचाव के जरूरी उपायों के बारे में विस्तार से समझाया।
क्या है थायराइड और इसके प्रकार?
मेदांता हॉस्पिटल के एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि थायराइड हमारे गले के निचले हिस्से में तितली के आकार की एक ग्रंथि होती है। यह शरीर की हर कोशिका के मेटाबॉलिज्म और कामकाज को नियंत्रित करने वाला जरूरी हार्मोन बनाती है। इसमें मुख्य रूप से दो तरह की गड़बड़ियां आती हैं:
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हाइपोथायराइडिज्म (हार्मोन की कमी): जब शरीर में जरूरत से कम थायराइड हार्मोन बनता है। इसके मुख्य लक्षण अत्यधिक थकान होना, तेजी से वजन बढ़ना, पैरों में सूजन और दिनभर नींद आना हैं। इसके लक्षण बहुत धीरे-धीरे सामने आते हैं, इसलिए लोग इसे अक्सर सामान्य थकान समझकर टाल देते हैं।
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हाइपरथायराइडिज्म (हार्मोन की अधिकता): जब यह ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है। इसमें मरीज का वजन तेजी से गिरने लगता है, अत्यधिक गर्मी और घबराहट महसूस होती है तथा शरीर में कमजोरी आने लगती है। कई बार आंखें सामान्य से ज्यादा बाहर उभरी हुई दिखने लगती हैं। यह समस्या 20 से 40 वर्ष की महिलाओं में सबसे ज्यादा देखी जाती है।
गले की गांठ (स्ट्रक्चरल बदलाव): गले में सूजन या गिल्टी (नोड्यूल) बनना भी थायराइड की समस्या का एक हिस्सा है।
गले की हर गांठ को न करें नजरअंदाज: डॉ. रोमा प्रधान
अस्पताल की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. रोमा प्रधान ने आगाह किया कि गले की किसी भी गांठ या गिल्टी को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। हालांकि अधिकांश गांठें सामान्य (Benign) होती हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह कैंसर का संकेत भी हो सकती हैं।
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जरूरी जांचें: अल्ट्रासाउंड और एफएनएसी (FNAC) टेस्ट से गांठ की सही प्रकृति का आसानी से पता लगाया जा सकता है।
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सर्जरी कब जरूरी: यदि गांठ बहुत बड़ी हो जाए, सांस लेने में तकलीफ हो या खाना निगलने में दिक्कत आए, तो ऑपरेशन की जरूरत होती है।
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विशेषज्ञ की सलाह: थायराइड के आसपास आवाज की नसें और पैराथायराइड ग्रंथियां होती हैं, इसलिए इसका ऑपरेशन हमेशा किसी अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टर से ही करवाना चाहिए।
क्यों बढ़ रहा है थायराइड का खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार, आजकल घरों में सेंधा नमक (Rock Salt) या बिना आयोडीन वाले नमक का चलन बढ़ा है। लंबे समय तक आयोडीन की कमी गॉइटर (घेंघा रोग) और थायराइड को न्योता देती है। हमेशा आयोडाइज्ड नमक का ही इस्तेमाल करें। इसके अलावा मानसिक तनाव, बढ़ता प्रदूषण और खान-पान में केमिकल्स व पेस्टिसाइड्स का होना भी थायराइड को ट्रिगर कर रहा है।
थायराइड की दवा लेने का सही नियम
अक्सर मरीज थायराइड की दवा खाने में लापरवाही करते हैं। डॉक्टरों ने इसके लिए एक सख्त गाइडलाइन बताई:
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दवा को हमेशा सुबह खाली पेट सिर्फ सादे पानी के साथ ही लें।
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दवा खाने के कम से कम आधे घंटे (30 मिनट) बाद तक चाय, कॉफी, नाश्ता या कुछ भी न खाएं-पीएं।
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अधिकांश मामलों में थायराइड की यह दवा जीवनभर या लंबे समय तक रोजाना खानी होती है, इसलिए इसे कभी भी डॉक्टर की सलाह के बिना बंद न करें।
थीम 2026: 'नो योर थायराइड' (अपने थायराइड को जानें)
कार्यक्रम के अंत में डॉ. अमित अग्रवाल ने लोगों से अपील की कि वे अपने शरीर में होने वाले बदलावों को पहचानें। इस वर्ष की थीम 'नो योर थायराइड' का उद्देश्य भी यही है कि लोग जागरूक बनें, समय पर रूटीन थायराइड प्रोफाइल टेस्ट करवाएं और एक स्वस्थ अनुशासित जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी को मात दें।
