विश्व जल दिवस: भरवारा STP पहुंचे इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के छात्र; सीखा अपशिष्ट जल को पुन: उपयोग के योग्य बनाने का हुनर
लखनऊ | 26 मार्च 2026
विश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में लखनऊ के भरवारा स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में एक विशेष शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और जल प्रबंधन की बारीकियों को समझा। इस वर्ष की वैश्विक थीम “Water and Gender: Where Water Flows, Equality Grows” को केंद्र में रखते हुए युवाओं को जल संरक्षण और सामाजिक समानता के अंतर्संबंधों के प्रति जागरूक किया गया।
तकनीक और स्वच्छता का संगम
भ्रमण के दौरान विशेषज्ञों ने छात्रों को संयंत्र की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक ज्ञान दिया। छात्रों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा कि कैसे शहर के गंदे पानी (अपशिष्ट जल) को आधुनिक मशीनों और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से उपचारित कर पुन: उपयोग के लायक बनाया जाता है। उन्हें प्लांट में अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों और जल शोधन की विभिन्न चरणों वाली प्रक्रियाओं से भी अवगत कराया गया।
परियोजना निदेशक का संदेश: 'जल प्रबंधन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी'
इस अवसर पर सुएज (Suez) के परियोजना निदेशक राजेश मठपाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा विश्व जल दिवस महज एक तारीख नहीं, बल्कि जल के प्रति हमारे उत्तरदायित्व को याद करने का दिन है। भरवारा STP जैसे संयंत्र न केवल पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं, बल्कि जल के पुनर्चक्रण (Recycling) के माध्यम से भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। जब युवा इन प्रक्रियाओं को समझेंगे, तभी जल संरक्षण और समानता का संदेश समाज के हर तबके तक प्रभावी रूप से पहुँचेगा।"
युवाओं ने लिया जल संरक्षण का संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर छात्रों ने प्लांट की जटिल कार्यप्रणाली को करीब से देखने के अनुभव को साझा किया। उन्होंने न केवल जल प्रबंधन की तकनीकी चुनौतियों को समझा, बल्कि दैनिक जीवन में पानी की एक-एक बूंद बचाने और समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने का सामूहिक संकल्प भी लिया।
भ्रमण के मुख्य बिंदु
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उद्देश्य: युवाओं को जल संसाधनों के सतत उपयोग और रीसाइक्लिंग तकनीक से परिचित कराना।
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थीम: जल और लैंगिक समानता (Water and Gender)।
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सीख: अपशिष्ट जल का सही उपचार कैसे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक है।
भरवारा STP का यह भ्रमण छात्रों के लिए केवल किताबी ज्ञान से परे एक व्यावहारिक अनुभव साबित हुआ। इस तरह की पहल युवाओं को पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाने में सहायक सिद्ध होती है।
