योगी सरकार की बड़ी पहल: सर्वोदय विद्यालयों के 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ मिलेगा हुनर
लखनऊ, 6सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। समाज कल्याण विभाग के तहत संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में पढ़ने वाले 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों को अब स्कूली शिक्षा के साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत विद्यार्थियों को विभिन्न रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस योजना के लिए 31 प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। चयनित संस्थाओं को प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, उनका अनुमोदन कराने, विद्यार्थियों का पंजीकरण करने और बैच गठित करने की प्रक्रिया तय समयसीमा में पूरी करनी होगी। सभी प्रशिक्षण केंद्रों पर 30 सितंबर 2026 तक प्रशिक्षण शुरू करना अनिवार्य किया गया है।
शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल पर जोर
व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ का मुख्य उद्देश्य सर्वोदय विद्यालयों के विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ ऐसे व्यावहारिक कौशल से जोड़ना है, जो उन्हें भविष्य में रोजगार, स्वरोजगार और बेहतर करियर के अवसरों के लिए तैयार कर सके।
विद्यार्थियों को उनकी रुचि और उपलब्ध प्रशिक्षण के आधार पर अपैरल, आईटी-आईटीईएस, मैनेजमेंट समेत विभिन्न रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि स्कूल स्तर पर ही व्यावसायिक कौशल से परिचित होने से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए जरूरी दक्षताएं विकसित होंगी।
एक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थी
प्रशिक्षण की गुणवत्ता और विद्यार्थियों पर पर्याप्त ध्यान सुनिश्चित करने के लिए बैच का आकार निर्धारित किया गया है। एक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थी शामिल किए जाएंगे, जबकि प्रशिक्षण की कुल अवधि 300 घंटे तक होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि विद्यार्थियों की नियमित स्कूली पढ़ाई प्रभावित किए बिना उन्हें कौशल आधारित प्रशिक्षण का अवसर मिल सके।
मान्यता प्राप्त जॉब रोल में ही मिलेगा प्रशिक्षण
कौशल विकास मिशन ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रमाणिकता बनाए रखने के लिए भी विस्तृत व्यवस्था की है। प्रशिक्षण प्रदाता को मिशन मुख्यालय में अनुबंध जमा कर उसकी पुष्टि करानी होगी। इसके बाद ही संबंधित जिले की जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (DPMU) को बैच गठित करने की अनुमति दी जाएगी।
बैच को मंजूरी देने से पहले संबंधित जॉब रोल की NCVET और NQR पोर्टल पर जांच की जाएगी। इसके बाद केवल वैध और मान्यता प्राप्त जॉब रोल में ही विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पोर्टल पर उन्हीं बैच और सेक्टर को मंजूरी मिलेगी, जो संबंधित प्रशिक्षण संस्था को आवंटित किए गए हैं। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और विद्यार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
प्रशिक्षण सामग्री देना भी अनिवार्य
विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान आवश्यक संसाधनों की कमी न हो, इसके लिए प्रशिक्षण प्रदाताओं को बैच शुरू होने के सात दिन के भीतर पाठ्य सामग्री उपलब्ध करानी होगी। विद्यार्थियों को सामग्री उपलब्ध कराने की हस्ताक्षरित रसीद और तस्वीरें मिशन पोर्टल पर अपलोड करना भी अनिवार्य होगा। प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम और मूल्यांकन संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल (SSC) के निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए भुगतान भी निर्धारित कॉमन कॉस्ट नॉर्म्स के आधार पर किया जाएगा।
प्रशिक्षण की गुणवत्ता और समयबद्धता प्राथमिकता
मिशन निदेशक पुलकित खरे ने सभी प्रशिक्षण प्रदाताओं को निर्धारित नियमों और समयसीमा के अनुसार प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ का उद्देश्य केवल कागजों पर प्रशिक्षण संचालित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को वास्तव में उपयोगी और गुणवत्तापूर्ण कौशल उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि स्कूल स्तर पर ही विद्यार्थियों को कौशल से जोड़ने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे आगे रोजगार तथा बेहतर करियर के अवसरों के लिए अधिक सक्षम बन सकेंगे। पुलकित खरे के अनुसार, ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के माध्यम से विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ हुनर में दक्ष बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करना मिशन की प्राथमिकता है, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी को इस पहल का पूरा लाभ मिल सके।
