Yogi Adityanath: सन्यासी की मर्यादा और कुशल प्रशासक का अद्भुत संगम, जानिए कैसे 'अजय सिंह बिष्ट' बने जननायक
- मनोज कुमार अग्रवाल
एक सन्यासी का जीवन जहां वैराग्य, साधना और ईश्वर भक्ति में बीतता है, वहीं एक कुशल प्रशासक का जीवन हर पल जनता की समस्याओं को सुलझाने और व्यवस्था को सुदृढ़ करने की चुनौतियों से भरा होता है। भारतीय राजनीति में इन दोनों विपरीत छोरों को एक साथ साधने वाले अद्वितीय और तेजस्वी नेता का नाम है— योगी आदित्यनाथ। सनातन मूल्यों, राष्ट्रीय चेतना और जनसेवा के लिए पूर्णतः समर्पित योगी जी के लिए भगवा केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व और गौरव का प्रतीक है।
अराजकता से सुशासन तक: 2017 के पहले और बाद का उत्तर प्रदेश
यदि हम साल 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की कल्पना करें, तो जेहन में कानून-व्यवस्था की बदहाली, भ्रष्टाचार, अपहरण और माफियाराज की खौफनाक तस्वीरें उभरती हैं। सरकारी ठेकों पर अपराधियों का कब्जा था, सत्ता के गलियारों से अधिकारियों को अपमानित करने की धमकियां खुलेआम दी जाती थीं। तुष्टिकरण के नाम पर अराजकता को संरक्षण प्राप्त था और बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के कारण हर साल सैकड़ों मासूम बच्चे दम तोड़ देते थे। दूसरी ओर, सरकारी धन का दुरुपयोग सैफई जैसे आयोजनों में होता था।
लेकिन साल 2017 में उत्तर प्रदेश के भाग्य ने करवट बदली। योगी आदित्यनाथ ने सूबे के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली और राज्य को एक सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर प्रदेश बनाने की दिशा में नए युग की शुरुआत की।
'अजय सिंह बिष्ट' से 'गोरक्षपीठाधीश्वर' बनने का सफर
योगी आदित्यनाथ का मूल नाम अजय सिंह बिष्ट है। उनका जन्म 05 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के एक बेहद साधारण परिवार में हुआ था। (आज 5 जून को उनका जन्मदिन भी है)।
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प्रखर छात्र जीवन: हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही उनकी तार्किक क्षमता, निर्णय लेने की कला और सामाजिक कार्यों के प्रति झुकाव दिखने लगा था।
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सन्यास की दीक्षा: शिक्षा पूरी करने के बाद उनका मन अध्यात्म की ओर रम गया और उन्हें गोरखपुर के श्रद्धेय महंत अवैद्यनाथ जी का सानिध्य मिला। 1994 में उन्होंने सन्यास की दीक्षा ली और नाथ संप्रदाय की कमान संभालते हुए सामाजिक सेवा को अपने जीवन का मुख्य ध्येय बना लिया।
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सबसे युवा सांसद: मात्र 26 वर्ष की आयु में वे पहली बार गोरखपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। अपनी मुखर वाक्पटुता और सीधे जनसंवाद के दम पर वे लगातार 5 बार गोरखपुर से सांसद रहे और देश की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा बने।
साधना, सादगी और कड़ा आत्मानुशासन
मुख्यमंत्री बनने के बाद भी योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आया। वे आज भी प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में सुबह 4 बजे उठकर अपनी साधना और प्रार्थना में लीन हो जाते हैं। करोड़ों की आबादी वाले राज्य का नेतृत्व करने वाले इस जननायक की कुल निजी संपत्ति में मात्र चार जोड़ी गेरुआ सूती कपड़े और पैरों में पहनने के लिए साधारण कपड़े के जूते शामिल हैं। गोरखनाथ मंदिर में गौसेवा करना और सादगी से रहना उनकी सात्विक जीवनशैली का हिस्सा है।
'यूपी मॉडल' की गूंज: अंगारे जैसे कड़े, मोम जैसे संवेदनशील
योगी आदित्यनाथ के शासन करने के तरीके को आज पूरे देश में 'यूपी मॉडल' के नाम से सराहा जा रहा है। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं:
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माफियाराज का अंत: अपराधियों और माफियाओं के अवैध साम्राज्य पर बुल्डोजर चलाकर 'ज़ीरो टॉलरेंस' की नीति लागू की गई, जिससे प्रदेश में सुरक्षा का ऐसा माहौल बना कि वैश्विक निवेशक सम्मेलन (GIS) के जरिए भारी निवेश आया।
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इन्फ्रास्ट्रक्चर में क्रांति: पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गंगा एक्सप्रेस-वे, जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और कई शहरों में मेट्रो परियोजनाओं ने यूपी के विकास को पंख लगा दिए।
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सांस्कृतिक पुनरुत्थान: काशी विश्वनाथ धाम, भव्य अयोध्या राम मंदिर, मथुरा-वृंदावन का कायाकल्प और अयोध्या के भव्य दीपोत्सव ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर स्थापित किया है।
वह जहां राष्ट्रविरोधियों और अपराधियों के लिए अंगारे की तरह कठोर हैं, वहीं गरीब, शोषित, पिछड़ों और फरियादियों के लिए उनका हृदय मोम की तरह संवेदनशील है। जातिवाद, वर्गभेद और तुष्टिकरण से कोसों दूर रहकर वे 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र पर काम करते हैं।
स्वर्णिम भविष्य के रचयिता
आज केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों की जनता भी अपने यहाँ 'यूपी मॉडल' लागू करने की मांग करती है। राजनीतिक गलियारों में उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे सशक्त और स्वाभाविक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है। एक वीतराग सन्यासी के हाथों में उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य ने जिस तरह विकास और सुरक्षा की नई इबारत लिखी है, उसे देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि योगी आदित्यनाथ आने वाले समय में भारत के स्वर्णिम भविष्य के मुख्य शिल्पकार साबित होंगे।

