योगी सरकार का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश: ₹9.12 लाख करोड़ का यूपी बजट 2026, विकास का नया रोडमैप
योगी बजट 2026: प्रमुख घोषणाएं (Highlights)
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन में नंबर वन बन चुका है और राज्य की अर्थव्यवस्था तेजी से $1 Trillion की ओर बढ़ रही है।
1. युवा और रोजगार
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10 लाख युवाओं को रोजगार: सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष में 10 लाख नए रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा है।
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मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना: 163 केंद्रों पर 23,000 से अधिक युवाओं को मुफ्त कोचिंग दी जा रही है।
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स्मार्टफोन/टैबलेट: स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत अब तक करीब 50 लाख डिवाइस बांटे जा चुके हैं।
2. महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा
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बेटियों की शादी: कन्या सुमंगला और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सहायता राशि में बढ़ोतरी के संकेत।
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वर्किंग वूमेन हॉस्टल: नगर निगमों में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल बनाए जाएंगे।
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सेफ सिटी प्रोजेक्ट: एण्टी रोमियों स्क्वाड और सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार कर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
3. बुनियादी ढांचा (Infrastructure)
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सड़क और सेतु: सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए 34,468 करोड़ रुपये का प्रस्ताव।
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शिक्षा और स्वास्थ्य: बजट का 12.4% हिस्सा शिक्षा पर और 6% स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया जाएगा।
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प्रति व्यक्ति आय: सरकार का अनुमान है कि 2025-26 में यूपी में प्रति व्यक्ति आय 1.20 लाख रुपये तक पहुंच जाएगी।
सियासी घमासान: "विदाई का बजट" बनाम "विकास का बजट"
बजट पेश होने के साथ ही विपक्ष ने सरकार पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं।
अखिलेश यादव (सपा अध्यक्ष): > "यह बीजेपी की विदाई का बजट है। सरकार केवल आंकड़ों की बाजीगरी कर रही है। हकीकत में रोजगार शून्य है और किसान कर्ज के बोझ तले दबा है। यह बजट केवल 5% अमीर लोगों को खुश करने के लिए है।"
शिवपाल यादव (सपा नेता): "अब जुमलों का बजट नहीं चलेगा। जनता हिसाब मांग रही है। युवाओं के हाथ में डिग्री है लेकिन काम नहीं।"
केशव प्रसाद मौर्य (डिप्टी सीएम): "सपा सत्ता के वियोग में बौखलाई हुई है। यह बजट विकसित उत्तर प्रदेश की नींव है और विपक्ष के पास विरोध के अलावा कोई विजन नहीं है।"
चुनावी रणभेरी का आगाज़?
चूँकि यह 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले का आखिरी पूर्ण बजट है, योगी सरकार ने इसके जरिए हर वर्ग (किसान, महिला, युवा) को साधने की कोशिश की है। विपक्ष इसे 'चुनावी लॉलीपॉप' बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे 'रामराज्य' की दिशा में बढ़ता कदम।
