भारतीय ज्ञान-परंपरा को पुनर्जीवित कर विकसित भारत का निर्माण करें युवा — महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम समिति और एकल फ्यूचर (यूथ विंग, एकल अभियान) के संयुक्त तत्वावधान में ‘युवा संवाद : शिक्षा से राष्ट्र निर्माण’ विषय पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय सभागार में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस अवसर पर जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि जी का विशेष सान्निध्य प्राप्त हुआ, जबकि भारत लोक शिक्षा परिषद के ट्रस्ट बोर्ड अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण गोयल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि जी का उद्बोधन
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि जी ने भारतीय गुरु–शिष्य परंपरा, वेदों के ज्ञान और प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि—
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भारतीय मूल्य–व्यवस्था आत्मिक शक्ति और अनुशासन पर आधारित है।
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युवा यदि अपनी ज्ञान–परंपरा से जुड़े रहें, तो भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
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राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं में सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रीय चेतना का सुदृढ़ होना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारतीय परंपराओं को पुनर्जीवित कर एक विकसित और सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान दें।
मुख्य अतिथि लक्ष्मी नारायण गोयल का संबोधन
श्री गोयल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि— भारतीय संस्कृति से दूर होने के कारण देश ने लंबे समय तक विदेशी शासन का दंश झेला। उन्होंने ‘एकल अभियान’ द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे शिक्षा और राष्ट्र-जागरण के कार्यों की सराहना की।
कार्यक्रम संयोजक का वक्तव्य
कार्यक्रम संयोजक एवं मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम समिति के अध्यक्ष तथा डीन प्लानिंग प्रो. निरंजन कुमार ने युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और उनके संकल्प को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया।उन्होंने मैकाले की शिक्षा नीति के नकारात्मक प्रभावों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस आह्वान—
“2035 तक मैकाले मॉडल को समाप्त कर भारतीय मॉडल स्थापित करना है”
उन्होंने कहा कि आज का युवा अपने सांस्कृतिक मूल्यों को पुनः आत्मसात कर देश के लिए नई दिशा तय कर रहा है।
एकल फ्यूचर का योगदान
एकल फ्यूचर के राष्ट्रीय अध्यक्ष दुर्गेश त्रिपाठी ने बताया कि देश के लगभग 1,10,000 दूरस्थ गाँवों में एकल विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 90% शिक्षक महिलाएँ हैं।
उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में—
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संस्कार आधारित शिक्षा
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जातिगत भेदभाव मिटाने का प्रयास
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राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ बनाना
—मुख्य उद्देश्य हैं।
उत्साहपूर्ण सहभागिता
कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के डीन, प्रोफेसर, शोधार्थी और अनेक गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
