भारतीय शतरंज का नया 'ग्रैंडमास्टर': 17 वर्षीय आरव डेंगला ने रचा इतिहास, जानें 5 साल की उम्र से 93वें GM बनने तक का सफर
बचपन से ही दिखने लगी थी 'मास्टर' वाली झलक
आरव के शतरंज के सफर की शुरुआत मात्र 5 वर्ष की कोमल आयु में हो गई थी। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि:
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7 साल की उम्र: वर्ष 2016 में उन्होंने MSSA अंडर-10 प्रतियोगिता जीतकर सबसे कम उम्र के विजेता का रिकॉर्ड बनाया।
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13 साल की उम्र: वे अंडर-13 आयु वर्ग में दुनिया के टॉप-5 खिलाड़ियों में शामिल हो चुके थे।
ग्रैंडमास्टर बनने की चुनौतीपूर्ण यात्रा
एक शतरंज खिलाड़ी के लिए 'ग्रैंडमास्टर' की उपाधि पाना हिमालय चढ़ने जैसा है, जिसे आरव ने तीन चरणों (Norms) में पूरा किया:
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पहला नॉर्म (2022): बोस्निया और हर्ज़ेगोविना के मेडजुनारोदनी टूर्नामेंट में।
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दूसरा नॉर्म (2025): क्रोएशिया में आयोजित 'जुपान्या सेलिब्रेट्स चेस' प्रतियोगिता में।
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तीसरा नॉर्म (2026): बोस्निया के 'जीएम मिक्स बिजेलजिना' टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के साथ खिताब अपने नाम किया।
त्याग और समर्पण की अनूठी मिसाल
आरव की इस वैश्विक सफलता के पीछे उनकी माँ, श्रीमती शिप्रा डेंगला का मूक बलिदान छिपा है। बेटे के शतरंज करियर को संवारने और उसे पूरा समय देने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी तक छोड़ दी। माँ का यही त्याग आरव की सफलता की सबसे मजबूत बुनियाद बना।
शिक्षा और खेल का सटीक संतुलन
आरव ने केवल खेल ही नहीं, बल्कि शिक्षा में भी उत्कृष्टता बनाए रखी है। धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल (मुंबई) के छात्र रहे आरव वर्तमान में अमेरिका की प्रतिष्ठित फिलिप्स एकेडमी से जुड़े हैं। उन्होंने वर्ष 2025-26 में एक 'गैप ईयर' लेने का साहसी निर्णय लिया, ताकि वे अपना पूरा ध्यान शतरंज पर केंद्रित कर सकें और भारत को ग्रैंडमास्टर का खिताब दिला सकें।
आरव की वर्तमान रेटिंग प्रोफाइल:
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क्लासिकल शतरंज: 2506
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रेपिड शतरंज: 2200
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ब्लिट्ज शतरंज: 2304
आरव डेंगला की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि भारतीय शतरंज के स्वर्णिम भविष्य का संकेत है। उनकी यह यात्रा देश के लाखों उभरते खिलाड़ियों के लिए संदेश है कि यदि अनुशासन, सही मार्गदर्शन और परिवार का साथ हो, तो दुनिया का कोई भी लक्ष्य अभेद्य नहीं है।
