गरीबी को मात देकर IPL में चमका बिहार का लाल साकिब हुसैन
सेना में जाने का था सपना, गरीबी बनी बाधा
साकिब का शुरुआती सपना इंडियन आर्मी में भर्ती होकर देश की सेवा करना था। इसके पीछे की वजह देशभक्ति के साथ-साथ गरीबी भी थी। साकिब के पास पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने खुद को शारीरिक रूप से इतना मजबूत बना लिया था कि वे पागलों की तरह दौड़ते थे ताकि सेना की फिजिकल परीक्षा पास कर सकें।
जब दोस्तों ने पहचाना 'क्रिकेट का हीरा'
साकिब की जबरदस्त फिटनेस और टेनिस बॉल क्रिकेट में उनकी बिजली जैसी रफ्तार वाली गेंदबाजी को देखकर उनके दोस्तों ने उन्हें क्रिकेटर बनने की सलाह दी। हालांकि, साकिब के माता-पिता इतने गरीब थे कि वे उनके लिए स्पोर्ट्स शूज (खेल के जूते) तक नहीं खरीद सकते थे। ऐसे वक्त में उनके दोस्तों और गांव के भाइयों ने धर्म और जाति की दीवारों को तोड़कर साकिब की मदद की। गोपालगंज के इस बेटे की मेहनत को देख पूरा जिला भावुक हो जाता था और सबने मिलकर साकिब की जरूरतों को पूरा किया।
सांप्रदायिक एकता की मिसाल है साकिब का गांव
साकिब की कहानी भारत की असली खूबसूरती को भी दर्शाती है। उनके संघर्ष में साथ देने वाले दोस्त सिर्फ एक समुदाय के नहीं थे। उनके गांव में हिंदू-मुस्लिम का कोई फर्क नहीं दिखता। वहां के भोले-भाले माता-पिता अपने बच्चों के सपने पूरे न होने पर अकेले में रोते जरूर थे, लेकिन आज साकिब की कामयाबी ने उन आँसुओं को खुशी में बदल दिया है।
IPL में किया ऐतिहासिक आगाज़
140+ किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करने वाले साकिब ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ अपनी प्रतिभा को साबित कर दिया है।
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स्पेल: 4 ओवर, 24 रन, 4 विकेट।
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खासियत: जबरदस्त फिटनेस और बेहतरीन बल्लेबाजी करने की क्षमता।
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कीर्तिमान: डेब्यू मैच में छठा सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन।
बिहार का दबदबा: अब क्रिकेट की बारी
साकिब हुसैन की यह सफलता इस बात का संकेत है कि अब बिहारी प्रतिभाएं क्रिकेट के मैदान पर भी अपना एकछत्र राज करने के लिए तैयार हैं। राजनीति और पढ़ाई (IAS/IPS) के बाद अब खेल के मैदान में भी बिहार का दबदबा बढ़ने वाला है। जिन लोगों ने कभी "मजदूर" कहकर बिहार के युवाओं का मजाक उड़ाया था, उन्हें साकिब जैसे खिलाड़ी अपनी परफॉरमेंस से जवाब दे रहे हैं।
साकिब हुसैन की ये तो बस शुरुआत है। जिस तरह की फिटनेस और जज्बा इस खिलाड़ी में है, आने वाले समय में वे न केवल IPL बल्कि भारतीय टीम के लिए भी 'बवाल' करने वाले हैं। साकिब की यह कहानी हर उस युवा के लिए है जो संसाधनों की कमी के कारण हार मान लेता है।
