CSK vs KKR IPL 2026 : मैदान पर काली पट्टी बांधकर क्यों उतरे खिलाड़ी?
96 वर्ष की आयु में हुआ निधन
भारतीय क्रिकेट के शुरुआती सुनहरे दौर के गवाह रहे सी.डी. गोपीनाथ का हाल ही में 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके सम्मान में न केवल खिलाड़ियों ने काली पट्टी बांधी, बल्कि केकेआर प्रबंधन ने भी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि करते हुए उनके योगदान को नमन किया।
कौन थे सी.डी. गोपीनाथ? भारतीय क्रिकेट का एक अमूल्य सितारा
सी.डी. गोपीनाथ का नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास के उन पन्नों में दर्ज है, जहाँ से टीम इंडिया ने जीतना सीखा था। उनका करियर और योगदान निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
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ऐतिहासिक जीत का हिस्सा: वह उस महान भारतीय टीम के सदस्य थे, जिसने 1952 में चेन्नई में इंग्लैंड को हराकर भारत को उसकी पहली टेस्ट जीत दिलाई थी।
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शानदार पदार्पण: उन्होंने 1951 से 1960 के बीच भारत के लिए 8 टेस्ट मैच खेले। अपने पहले ही टेस्ट में इंग्लैंड के विरुद्ध नाबाद 50 और 42 रनों की यादगार पारियां खेलकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
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घरेलू क्रिकेट के नायक: तमिलनाडु (तत्कालीन मद्रास) टीम के कप्तान के रूप में उन्होंने 1954-55 में टीम को पहली रणजी ट्रॉफी जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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बहुमुखी योगदान: संन्यास के बाद वे नेशनल सिलेक्टर रहे और 1979 के इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम के मैनेजर की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई।
BCCI ने प्रकट की गहरी संवेदना
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने उनके निधन को एक युग का अंत बताया है। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने अपने बयान में कहा सी.डी. गोपीनाथ उस पीढ़ी के प्रतिनिधि थे, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट की नींव रखी। भारत की पहली टेस्ट जीत में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। बीसीसीआई उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता है।"
