गौतम गंभीर का बड़ा खुलासा: संजू सैमसन को इंग्लैंड सीरीज से बाहर करना मेरे कार्यकाल का सबसे कठिन फैसला था
फगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज में शानदार वापसी करने वाले संजू सैमसन को लेकर भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने बड़ा बयान दिया है। गंभीर ने कहा कि इंग्लैंड सीरीज के दौरान सैमसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखना उनके कोचिंग कार्यकाल का अब तक का सबसे कठिन फैसला था।
सैमसन ने अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में 117 रन बनाए। उन्होंने दो अर्धशतक लगाए और करीब 180 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। इससे पहले उन्हें इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर लगातार खराब प्रदर्शन के बाद टीम से बाहर कर दिया गया था। हालांकि, 2026 टी20 विश्व कप में वह ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ रहे थे।
रन नहीं, टीम पर प्रभाव सबसे ज्यादा मायने रखता है’
गंभीर ने कहा कि टीम प्रबंधन के लिए केवल व्यक्तिगत आंकड़े महत्वपूर्ण नहीं हैं। उनका जोर इस बात पर रहता है कि कोई खिलाड़ी टीम के प्रदर्शन पर कितना प्रभाव डालता है।उन्होंने कहा कि टी20 क्रिकेट में केवल रन और विकेट ही सफलता का पैमाना नहीं हैं, बल्कि यह देखा जाता है कि बल्लेबाजी और गेंदबाजी से टीम पर कितना असर पड़ा। अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे टी20 मैच में भारत ने पावरप्ले में 100 रन पूरे किए, जिसे गंभीर ने अपने कोचिंग कार्यकाल का खास उपलब्धि वाला क्षण बताया।
गंभीर के मुताबिक भारतीय टीम अब बड़े लक्ष्य तय कर रही है और 300 रन का आंकड़ा पार करना भी भविष्य के लक्ष्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि टीम में मौजूद प्रतिभा को देखते हुए भारतीय खिलाड़ी असाधारण प्रदर्शन करने में सक्षम हैं।
सैमसन को बाहर करना था सबसे कठिन फैसला
संजू सैमसन के बारे में गंभीर ने कहा कि उनकी प्रतिभा पर कभी सवाल नहीं रहा। विश्व कप में ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ बनना इस बात का प्रमाण है कि उनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने की क्षमता है।गंभीर ने स्वीकार किया कि इंग्लैंड सीरीज में सैमसन को बाहर रखना उनके कार्यकाल का सबसे कठिन निर्णय था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीम चयन में कई बार खिलाड़ियों के मौजूदा फॉर्म को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
विश्व कप वाली टीम पर भरोसा बनाए रखने की रणनीति
गंभीर ने बताया कि टीम प्रबंधन की योजना पहले से ही विश्व कप जीतने वाली टीम संयोजन पर वापस लौटने की थी। उनके अनुसार, कुछ मैचों में खराब प्रदर्शन से कोई खिलाड़ी खराब नहीं हो जाता।उन्होंने कहा कि जो टीम एक विश्व कप से अगले विश्व कप तक लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए चैंपियन बनी है, उसे केवल एक-दो सीरीज के नतीजों के आधार पर कमजोर नहीं माना जा सकता। इसी सोच के तहत टीम प्रबंधन ने अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखा।
वैभव सूर्यवंशी को करना पड़ा इंतजार
सैमसन की वापसी का असर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के चयन पर भी पड़ा। 15 वर्षीय वैभव को अफगानिस्तान सीरीज में प्लेइंग इलेवन से बाहर रहना पड़ा।गंभीर ने इसे युवा खिलाड़ी के लिए झटका नहीं, बल्कि इंतजार और सीखने की प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि टीम प्रबंधन वैभव की प्रतिभा से पूरी तरह परिचित है, लेकिन पिछले दो वर्षों से लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाला खिलाड़ी फिलहाल उस खिलाड़ी से आगे रहेगा जिसने अभी टीम में जगह बनाई है।
गंभीर ने भरोसा जताया कि जब वैभव को मौका मिलेगा तो उन्हें पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे। उनके अनुसार भारतीय क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा जरूरी है और उम्र चाहे 15 वर्ष हो या 30, जब अवसर के लिए इंतजार करना पड़े तो खिलाड़ी को धैर्य रखना होता है।
