ऐतिहासिक विजय: जन्म से दृष्टिबाधित वीरेंद्र पाल के नेतृत्व में यूपी ने जीती ब्लाइंड क्रिकेट ट्रॉफी
जन्म से दृष्टिबाधित, लेकिन हौसले बुलंद
बाराबंकी जनपद के ग्राम करेदेवन (पोस्ट-इब्राहिमाबाद) निवासी वीरेंद्र पाल जन्म से ही दृष्टिबाधित हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने जुनून के दम पर खेल जगत में नई पहचान बनाई। उनके पिता रामविलास ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया।
वीरेंद्र पाल ने शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय से बी.ए. और एम.ए. (इतिहास) की पढ़ाई पूरी की है और वर्तमान में बी.एड. (स्पेशल एजुकेशन) के छात्र हैं।
रणनीति और जज्बे से बनी चैंपियन टीम
वर्ष 2010 से क्रिकेट से जुड़े वीरेंद्र पाल ने अपने अनुभव और रणनीतिक सोच से खिलाड़ियों में जीत का आत्मविश्वास भरा। फाइनल मुकाबले में बारिश के कारण मैच को 6-6 ओवर का कर दिया गया था, लेकिन दबाव भरे इस मैच में उत्तर प्रदेश की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महाराष्ट्र को मात दी।
लीग मुकाबलों में भी यूपी का दबदबा
- उत्तराखंड के खिलाफ: उत्तर प्रदेश ने 237 रन बनाए और विपक्षी टीम को 150 रन पर रोक दिया।
- मध्य प्रदेश के खिलाफ: यूपी ने 243 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया और मध्य प्रदेश को 108 रन पर समेट दिया।
चैंपियन टीम के खिलाड़ी
इस ऐतिहासिक जीत में योगदान देने वाले खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के नाम इस प्रकार हैं—
- वीरेंद्र पाल (कोच) – बी-2
- संजीत तिवारी (कप्तान) – बी-1
- रंजीत – बी-1
- अंकुर कुमार – बी-1
- गोलू – बी-1
- पवन मिश्रा – बी-1
- रजत कुमार – बी-2
- ओम प्रकाश – बी-2
- कार्तिक त्रिपाठी – बी-2
- मोहम्मद शहजाद – बी-2
- अक्षय – बी-2
- चन्द्रभान – बी-2
- अजीत बाबू – बी-2
- हरिबाबू – बी-2
- चन्दन कुमार – कोच
- मोहम्मद आजम – मैनेजर
खेल जगत के लिए प्रेरणा
ब्लाइंड स्पोर्ट्स एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के सचिव डॉ. ए.वी. पाठक ने इस ऐतिहासिक जीत पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वीरेंद्र पाल जैसे समर्पित और संघर्षशील व्यक्तित्व की वजह से आज उत्तर प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित हुआ है। यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को सच करने का साहस रखते हैं।



