लखनऊ: बलरामपुर अस्पताल में बड़े मंगलवार पर उमड़ा जनसैलाब, 25 वर्षों से गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल बन रहा यह भंडारा
विधि-विधान से पूजा और खुशहाली की प्रार्थना
कार्यक्रम की शुरुआत संकटमोचन हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना, भव्य आरती और छप्पन भोग लगाने के साथ हुई। इस दौरान महासंघ के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों ने सामूहिक रूप से देश और प्रदेश में शांति, समृद्धि, आपसी सौहार्द और भाईचारा बनाए रखने की प्रार्थना की। दोपहर 12 बजे से शुरू हुआ यह भंडारा देर शाम तक अनवरत चलता रहा, जिसमें हजारों की संख्या में राहगीरों, मरीजों के तीमारदारों और स्थानीय लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

सामाजिक एकता का प्रतीक हैं ऐसे आयोजन: अशोक कुमार
इस भव्य भंडारा कार्यक्रम का आधिकारिक उद्घाटन चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ, उत्तर प्रदेश के प्रधान महासचिव अशोक कुमार द्वारा किया गया "इस तरह के धार्मिक और सामाजिक सरोकार से जुड़े आयोजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं। ये कार्यक्रम समाज में ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर एकता, भाईचारे और नि:स्वार्थ सेवा भावना को मजबूत करते हैं।" — अशोक कुमार, प्रधान महासचिव (चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ, उ.प्र.)
आयोजन में शामिल हुईं कई प्रमुख हस्तियां
25वें वर्ष में प्रवेश कर चुके इस पारंपरिक भंडारे में चिकित्सा और राजनीति क्षेत्र की कई दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की और प्रसाद वितरण सेवा में हाथ बंटाया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल होने वाले अतिथि:
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त्रिभुवन राम (माननीय विधायक, अजगरा - वाराणसी)
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डॉ. जे. पी. गुप्ता (निदेशक, श्यामा प्रसाद मुखर्जी चिकित्सालय)
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डॉ. पी. के. श्रीवास्तव (अधीक्षक, बलरामपुर चिकित्सालय, लखनऊ)
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कमल श्रीवास्तव (महामंत्री, लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन)
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सुनील कुमार (कोषाध्यक्ष, चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ, उ.प्र.)
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कपिल वर्मा (जिलाध्यक्ष, चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ, लखनऊ)
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सर्वेश पाटिल (अध्यक्ष, ऑप्टोमेट्रिस्ट एसोसिएशन, उ.प्र.)
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श्रवण सचान, गोल्डी शर्मा और जितेन्द्र सिंह सहित कई गणमान्य नागरिक।
सेवा और समर्पण का संकल्प
वहाँ मौजूद सभी अतिथियों और चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस बात की सराहना की कि ढाई दशकों से बिना रुके यह आयोजन लखनऊ की साझी संस्कृति (गंगा-जमुनी तहज़ीब) को जीवंत बनाए हुए है। पूरे अस्पताल परिसर का माहौल भक्ति, सेवा और समर्पण के रंग में डूबा नजर आया। चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ उत्तर प्रदेश परिवार ने इस सफल आयोजन के बाद यह संकल्प लिया कि समाज सेवा, लोक कल्याण और आपसी प्रेम को बढ़ावा देने वाली यह खूबसूरत परंपरा भविष्य में भी इसी तरह पूरी निष्ठा के साथ जारी रहेगी।

