मयंक यादव को लगातार मौके मिलने चाहिए, तेज गेंदबाजों की पिटाई पर इतना हंगामा क्यों?
किसी खिलाड़ी का अंतरराष्ट्रीय करियर कितना लंबा होगा, यह काफी हद तक टीम मैनेजमेंट, कप्तान और कोच के भरोसे पर निर्भर करता है। रोहित शर्मा को ही देख लीजिए। अगर तत्कालीन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने उन्हें वनडे क्रिकेट में ओपनिंग करने का मौका नहीं दिया होता और लगातार उन पर भरोसा नहीं जताया होता, तो शायद उनका वनडे करियर भी उस दिशा में आगे नहीं बढ़ पाता, जिस मुकाम पर आज वह पहुंचा है। सूर्यकुमार यादव का वनडे करियर भी इस बात का उदाहरण है कि एक प्रारूप में शानदार प्रदर्शन करने वाला खिलाड़ी दूसरे प्रारूप में वैसी सफलता हासिल नहीं कर पाता।
मयंक यादव की असली ताकत उनकी तेज गेंदबाजी है
अब मयंक यादव को ही देख लीजिए। उनके पास जबरदस्त रफ्तार है, गेंद को सही लाइन-लेंथ पर डालने की क्षमता है और बल्लेबाजों पर दबाव बनाने का हुनर भी है। वह अभी अपने खेल को निखारने के दौर में हैं। ऐसे खिलाड़ी को कुछ खराब प्रदर्शनों के आधार पर खारिज कर देना किसी भी तरह उचित नहीं है।
हां, उनकी फील्डिंग और कैचिंग में सुधार की काफी गुंजाइश है। इस कमजोरी पर उन्हें मेहनत करनी चाहिए। लेकिन जब बात उनकी गेंदबाजी की आती है, तो उनकी रफ्तार और आक्रामक अंदाज उन्हें खास बनाते हैं। भारतीय टीम को ऐसे तेज गेंदबाज की जरूरत है, जो अपनी गति से बल्लेबाजों को असहज कर सके और विकेट निकालने का प्रयास करे।
मयंक एक आक्रामक तेज गेंदबाज हैं। ऐसे गेंदबाज कभी मैच का रुख बदल देते हैं, तो कभी अपनी आक्रामकता के कारण महंगे साबित होते हैं। दुनिया के महान तेज गेंदबाज भी इससे अछूते नहीं रहे हैं। ब्रेट ली, शोएब अख्तर, डेल स्टेन, मिचेल स्टार्क और जोफ्रा आर्चर जैसे दिग्गजों के करियर में भी ऐसे मुकाबले आए हैं, जिनमें उन्हें खूब रन पड़े।
तेज गेंदबाजी का मतलब केवल रन रोकना नहीं, बल्कि विकेट लेने के लिए बल्लेबाज पर लगातार दबाव बनाना भी है। जब बड़े-बड़े गेंदबाज खराब दिन का सामना कर सकते हैं, तो मयंक यादव की पिटाई पर ही इतना हंगामा क्यों?
दूसरे तेज गेंदबाज भी हुए हैं महंगे
वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज शमार जोसेफ का उदाहरण भी इस बहस में दिया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि जिस मुकाबले में मयंक यादव ने 24 गेंदों में करीब 50 रन दिए, उसी मैच में शमार जोसेफ ने महज 12 गेंदों में लगभग 45 रन खर्च कर दिए। अर्शदीप सिंह के भी लगभग उतने ही रन देने की बात कही जा रही है।
यदि ये आंकड़े संबंधित मुकाबले के आधिकारिक स्कोरकार्ड से मेल खाते हैं, तो वे इस बात को समझने में मदद कर सकते हैं कि खराब प्रदर्शन किसी एक गेंदबाज तक सीमित नहीं होता। हालांकि, किसी गेंदबाज के प्रदर्शन का सही आकलन करने के लिए मैच की परिस्थितियों, पिच, बल्लेबाजों के आक्रामक रुख और गेंदबाजी के समय को भी देखना जरूरी है।
किसी एक खराब मैच को किसी खिलाड़ी की पूरी क्षमता का पैमाना नहीं बनाया जा सकता। तेज गेंदबाजों के लिए परिस्थितियां कई बार बेहद चुनौतीपूर्ण होती हैं। जिस पिच पर बल्लेबाज आसानी से बड़े शॉट खेल रहे हों, वहां अनुभवी गेंदबाजों को भी रन रोकने में परेशानी हो सकती है।
आलोचना हो, लेकिन प्रतिभा के साथ न्याय भी जरूरी
मयंक यादव की फील्डिंग और कैचिंग की आलोचना करना बिल्कुल जायज है। जहां कमी है, वहां सुधार होना चाहिए। लेकिन उनकी गेंदबाजी की क्षमता को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। उनकी गति, आक्रामकता और विकेट लेने की क्षमता को देखते हुए उन्हें अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।
जब किसी दूसरे तेज गेंदबाज को खराब प्रदर्शन के बाद भी लगातार मौके देकर तैयार किया जा सकता है, तो मयंक यादव के मामले में अलग रवैया क्यों अपनाया जाए? प्रसिद्ध कृष्णा समेत अन्य तेज गेंदबाजों के करियर में भी उतार-चढ़ाव आए हैं। ऐसे में मयंक को भी अपनी गलतियों से सीखने और बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर मिलना चाहिए।
भारतीय क्रिकेट को केवल तैयार सितारों की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसे युवा खिलाड़ियों की भी जरूरत है, जिन्हें सही मार्गदर्शन और भरोसे के साथ भविष्य का सितारा बनाया जा सके। मयंक यादव को मौका देना उनकी हर गलती को नजरअंदाज करना नहीं है, बल्कि उनकी कमजोरियों को दूर करते हुए उनकी ताकत का सही इस्तेमाल करना है।
आखिरकार, किसी खिलाड़ी का भविष्य एक खराब मैच से तय नहीं होना चाहिए। मयंक यादव को अपनी रफ्तार और प्रतिभा साबित करने का मौका मिलना चाहिए। आलोचना जरूर कीजिए, लेकिन इतनी जल्दी किसी युवा तेज गेंदबाज की संभावनाओं पर विराम मत लगाइए।
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