रवि बिश्नोई की नो-बॉल समस्या पर मुरली कार्तिक का बड़ा विश्लेषण, बताया एक्शन नहीं रन-अप में है असली गड़बड़

Murali Kartik's in-depth analysis of Ravi Bishnoi's no-ball issue: identifies the run-up, not the bowling action, as the real problem.
 
रवि बिश्नोई की नो-बॉल समस्या पर मुरली कार्तिक का बड़ा विश्लेषण, बताया एक्शन नहीं रन-अप में है असली गड़बड़

इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए दूसरे टी20 इंटरनेशनल (T20I) मुकाबले में भारतीय लेग स्पिनर रवि बिश्नोई की लगातार बैक-फुट नो-बॉल (Back-foot No-ball) चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मैच के एक ही ओवर में बिश्नोई ने 29 रन लुटाए, जिसने टीम इंडिया की हार में बड़ी भूमिका निभाई। अब भारत के पूर्व दिग्गज स्पिनर मुरली कार्तिक ने बिश्नोई की इस तकनीकी समस्या का गहराई से विश्लेषण किया है और इसका सटीक समाधान सुझाया है।

मुरली कार्तिक का मानना है कि रवि बिश्नोई की इस समस्या का कारण उनका गेंदबाजी एक्शन नहीं, बल्कि उनका बदला हुआ 'रन-अप' (Run-up) है। अगर वह अपनी पुरानी तकनीक पर लौटते हैं, तो बिना एक्शन बदले इस कमी को दूर कर सकते हैं।

बदले हुए रन-अप से बिगड़ा टी20 का खेल

समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) से बातचीत करते हुए पूर्व लेफ्ट आर्म स्पिनर मुरली कार्तिक ने बताया कि बिश्नोई की बैक-फुट नो-बॉल की समस्या उनके क्रीज तक दौड़कर आने के तरीके और गेंद रिलीज करने से ठीक पहले की 'बॉडी पोजिशन' से जुड़ी है।

कार्तिक ने तकनीकी पहलू समझाते हुए कहा जब आपका रन-अप और लोडिंग (गेंद फेंकने के लिए शरीर को तैयार करना) एक खास तरीके का होता है, तो बैक-फुट नो-बॉल होने की संभावना बढ़ जाती है। पिछले कुछ सालों में रवि बिश्नोई ने अपने रन-अप में कई बदलाव किए हैं।

उन्होंने आगे याद दिलाया कि आईपीएल (IPL) में लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए खेलते समय बिश्नोई का रन-अप काफी सीधा था। रणजी ट्रॉफी (रेड-बॉल क्रिकेट) खेलने के चक्कर में उन्होंने अपनी तकनीक और रन-अप में बदलाव करने की कोशिश की, जिसका सीधा असर उनके टी20 गेम पर पड़ा है। आईपीएल के दौरान उनका रन-अप 'सेमी-सर्कल' (अर्धवृत्ताकार) या सी-शेप (C-Shape) जैसा था, जो उन्हें सही पोजीशन में लाता था।

बिश्नोई नहीं हैं पारंपरिक लेग स्पिनर

मुरली कार्तिक ने साफ किया कि रवि बिश्नोई एक पारंपरिक लेग स्पिनर नहीं हैं, बल्कि वे मुख्य रूप से एक गूगली गेंदबाज हैं। यही वजह है कि उनकी गेंदबाजी की बनावट अलग है।

  • पारंपरिक लेग स्पिनर: एक सामान्य लेग स्पिनर जब गेंद छोड़ता है, तो उसका हाथ कान से थोड़ा दूर होता है ताकि गेंद को अधिक स्पिन और फ्लाइट मिल सके। गेंद फेंकते वक्त हथेली मिडविकेट की तरफ और दाहिने हाथ का पिछला हिस्सा कवर्स की दिशा में होता है।

  • रवि बिश्नोई का एक्शन: चूंकि बिश्नोई ज्यादातर गूगली और बाएं हाथ के बल्लेबाजों के लिए स्लाइडर फेंकते हैं, इसलिए गेंद लोड करते समय उनका दाहिना हाथ कान के बिल्कुल करीब रहता है।

क्या है कार्तिक का समाधान?

मुरली कार्तिक के अनुसार, रवि बिश्नोई को अपने गेंदबाजी एक्शन में किसी भी तरह की छेड़छाड़ करने की जरूरत नहीं है। उन्हें बस अपने पुराने और छोटे 'C-Shape' रन-अप पर वापस लौट जाना चाहिए। अर्धवृत्ताकार दौड़ से उनकी बॉडी पोजीशन क्रीज पर बिल्कुल सटीक बैठेगी और बैक-फुट नो-बॉल की यह गंभीर समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

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