सिर्फ रफ्तार, लाइन-लेंथ नहीं – भारतीय तेज गेंदबाजों के करियर पर लगा एक पुराना ठप्पा

Just speed, not line-length - an old label on the careers of Indian fast bowlers
 
वरुण आरोन को यही सुनना पड़ा, आज उमरान मलिक

इसके पास सिर्फ गति है, लाइन-लेंथ नहीं"  यह एक ऐसा घिसा-पिटा जुमला है, जिसने न जाने कितने भारतीय तेज गेंदबाजों का करियर शुरू होने से पहले ही खत्म कर दिया। दुनिया में कोई भी तेज गेंदबाज हर मैच में किफायती नहीं हो सकता; कभी-कभी महंगे साबित होना इस कला का स्वाभाविक हिस्सा है। लेकिन जैसे ही कोई पेसर भारतीय टीम में आता है, उसकी हर गलती इसी एक वाक्य में समेट दी जाती है।

असल सवाल यह है — हम एक भारतीय तेज गेंदबाज से चाहते क्या हैं? जब कोई युवा गेंदबाज 150+ किमी/घंटा की रफ्तार से सबका ध्यान खींचता है, तो हमें लगता है कि अब हमारे पास भी विदेशी सितारों जैसा पेसर है। लेकिन जैसे ही वह कुछ मैचों में रन लुटा देता है, वही पुराना आरोप फिर दोहराया जाने लगता है।

अतीत में वरुण आरोन को यही सुनना पड़ा, आज उमरान मलिक को यही कहा जाता है। कल को मयंक यादव, जो इस वक्त फिटनेस और चोटों को लेकर ट्रोल हो रहे हैं, भी शायद इसी ‘लाइन-लेंथ’ वाले घेरे में आ जाएंगे।

अगर लाइन-लेंथ ही करियर का असली पैमाना है, तो भुवनेश्वर कुमार और जयदेव उनादकट का अंतरराष्ट्रीय सफर इतनी जल्दी क्यों ढलान पर आ गया? शिवम दुबे और शार्दुल ठाकुर की लाइन-लेंथ में भी कोई बड़ी कमी नहीं है, फिर उन्हें हर मैच में क्यों नहीं खिलाया जाता?

हकीकत यह है कि तेज गेंदबाजों की असफलता का ठीकरा अक्सर इसी पुराने बहाने पर फोड़ दिया जाता है। अतीत के वरुण आरोन से लेकर आज के उमरान मलिक और मयंक यादव तक, और शायद आने वाले कल के कई और नाम भी, इसी आरोप के नीचे दबकर गुमनामी में खो सकते हैं।

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