ऑनलाइन गेमिंग विनियमन विधेयक 2025, फैंटेसी गेमिंग पर असर
लोकसभा में बुधवार को ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक 2025 पेश किया गया। माना जा रहा है कि इस विधेयक के लागू होने से बीसीसीआई और पूरे क्रिकेट जगत को बड़ा वित्तीय झटका लग सकता है।
दरअसल, वर्तमान समय में क्रिकेट के स्पॉन्सरशिप और विज्ञापन बाजार का बड़ा हिस्सा फैंटेसी और रियल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म से आता है। अगर यह बिल कानून बनता है तो ऐसे प्लेटफॉर्म पर रोक लग जाएगी, जिससे क्रिकेट से जुड़े स्पॉन्सरशिप कॉन्ट्रैक्ट्स, खिलाड़ियों के व्यक्तिगत विज्ञापन करार और लीग आधारित खेल आयोजनों की आय पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है
नई दिल्ली, 21 अगस्त 2025। लोकसभा में बुधवार को प्रस्तुत ‘ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक 2025’ वास्तविक धन से चलने वाले ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के भविष्य पर रोक लगा सकता है। ऐसे प्लेटफॉर्म क्रिकेट और अन्य खेलों के प्रायोजन बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। विधेयक का उद्देश्य तेजी से बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को नियंत्रित करना है। यह ई-स्पोर्ट्स उद्योग के लिए अच्छी खबर है, लेकिन अरबों डॉलर के फैंटेसी गेमिंग कारोबार को बड़ा झटका लग सकता है। परिणामस्वरूप क्रिकेट, कबड्डी और फुटबॉल जैसे खेलों में प्रायोजन पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
नए बिल के अनुसार, एक नियामक संस्था बनाई जाएगी जो चार क्षेत्रों पर निगरानी रखेगी—
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ई-स्पोर्ट्स
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शैक्षणिक गेमिंग
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सोशल व कैजुअल गेमिंग
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वास्तविक धन से संचालित गेमिंग
दस्तावेज़ के मुताबिक ‘ऑनलाइन मनी गेम्स’ पूरी तरह प्रतिबंधित होंगे। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति या संस्था ऐसे गेम्स की पेशकश, प्रोत्साहन या वित्तीय लेनदेन की सुविधा नहीं देगा। साथ ही बैंक और वित्तीय संस्थानों को भी इन सेवाओं से जुड़ी लेन-देन गतिविधियों से दूर रहने का निर्देश होगा।
सामाजिक समस्याओं पर लगाम की कवायद
सरकार का तर्क है कि वास्तविक धन वाले गेमिंग प्लेटफॉर्म सामाजिक समस्याओं को जन्म दे रहे हैं। खासकर क्रिकेट में इनका प्रभाव बहुत बढ़ गया है। भारतीय क्रिकेट टीम के टाइटल स्पॉन्सर ड्रीम 11 और आईपीएल के आधिकारिक फैंटेसी पार्टनर माई11 सर्कल इसी श्रेणी में आते हैं।
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ड्रीम 11 ने भारतीय टीम के टाइटल राइट्स करीब 358 करोड़ रुपये में खरीदे।
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माई11 सर्कल ने आईपीएल फैंटेसी अधिकार पांच साल के लिए 625 करोड़ रुपये में लिए।
इसके अलावा, कई मौजूदा और पूर्व क्रिकेटर भी इन कंपनियों से भारी-भरकम विज्ञापन करार कर चुके हैं।
क्रिकेट प्रायोजन को होगा नुकसान
खेल कानून विशेषज्ञ विदुषपत सिंघानिया के अनुसार, “भारत में क्रिकेट का बाजार बड़ा है, इसलिए स्पॉन्सर्स की कमी नहीं होगी, लेकिन व्यक्तिगत खिलाड़ियों के प्रायोजन और फैंस की भागीदारी पर असर पड़ेगा।” उन्होंने सुझाव दिया कि फैंटेसी गेमिंग कंपनियां सब्सक्रिप्शन मॉडल अपना सकती हैं। यानी यूजर्स शुल्क देकर गेमिंग का अनुभव ले सकते हैं, लेकिन वास्तविक धन पर आधारित दांव लगाना प्रतिबंधित होगा।
ई-स्पोर्ट्स के लिए नए अवसर
हालांकि, ई-स्पोर्ट्स सेक्टर के लिए यह विधेयक सकारात्मक माना जा रहा है। 2023 में एशियाई खेलों में ई-स्पोर्ट्स ने आधिकारिक एंट्री की थी और 2027 में रियाद में पहला ई-स्पोर्ट्स ओलंपिक आयोजित होगा।
नोडविन गेमिंग के सह-संस्थापक अक्षत राठी कहते हैं, “सरकार का ई-स्पोर्ट्स को मान्यता और बढ़ावा देने का प्रयास स्वागत योग्य है। हालांकि जरूरी है कि विधेयक में प्रयुक्त परिभाषाएं—ई-स्पोर्ट्स, ऑनलाइन गेमिंग, सोशल गेमिंग और मनी गेमिंग—स्पष्ट और अलग-अलग रूप से दर्ज हों।”
