गोंडा में लगातार कुश्ती आयोजन पर उठे सवाल, WFI पर बढ़ा पारदर्शिता का दबाव
Questions raised about the continued wrestling events in Gonda, increasing pressure on WFI for transparency
Tue, 12 May 2026
Wrestling Federation of India द्वारा उत्तर प्रदेश के Gonda में लगातार सीनियर नेशनल रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता कराए जाने को लेकर विवाद सिर्फ खेल आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजनीति, प्रभाव, खेल प्रशासन और खिलाड़ियों के भरोसे जैसे कई पहलू जुड़े हुए हैं।
आखिर गोंडा ही क्यों?
WFI की ओर से आधिकारिक तर्क यह दिया गया है कि Nandini Nagar Sports Stadium में बड़े स्तर पर खिलाड़ियों के ठहरने, भोजन और प्रतियोगिता संचालन की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है।
करीब 800 से 1000 पहलवानों, कोचों और स्टाफ के लिए एक ही परिसर में आवास और प्रतियोगिता की सुविधा मिलना आयोजन के लिहाज से बड़ा कारण बताया जा रहा है।
WFI अध्यक्ष Sanjay Singh के अनुसार, कई स्थानों का निरीक्षण करने के बाद गोंडा को चुना गया, क्योंकि कम समय में इतनी बड़ी व्यवस्था वहां संभव थी।
फिर दिल्ली या लखनऊ क्यों नहीं?
सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि:
New Delhi में WFI का मुख्यालय है।
वहां Indira Gandhi Indoor Stadium जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल परिसर मौजूद हैं।
Lucknow में KD Singh Babu Stadium जैसी सुविधाएं हैं।
हरियाणा, जहां से सबसे अधिक पहलवान आते हैं, वहां भी आधुनिक रेसलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।
ऐसे में लगातार तीन बार गोंडा में आयोजन होना स्वाभाविक रूप से सवाल पैदा करता है।
बृजभूषण शरण सिंह का प्रभाव कितना?
Brij Bhushan Sharan Singh लंबे समय तक भारतीय कुश्ती राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरे रहे हैं। गोंडा उनका राजनीतिक गढ़ माना जाता है।
हालांकि वे अब WFI अध्यक्ष नहीं हैं, लेकिन मौजूदा अध्यक्ष Sanjay Singh को उनका करीबी माना जाता है। यही वजह है कि आलोचक मानते हैं कि संगठन पर उनका प्रभाव अभी भी बना हुआ है।
विनेश फोगाट ने क्या आरोप लगाए?
Vinesh Phogat ने खुले तौर पर कहा कि:
रेफरी नियुक्ति से लेकर मुकाबलों के फैसलों तक प्रभाव डाला जा सकता है।
गोंडा में आयोजन होने से खिलाड़ियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव रहेगा।
बृजभूषण के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिला पहलवानों के लिए वहां जाकर खेलना सहज नहीं है।
उनके बयान खेल प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं।
क्या आरोप साबित हुए हैं?
अब तक ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि मुकाबलों के नतीजे या रेफरिंग सीधे तौर पर प्रभावित की गई हो।
लेकिन यह भी सच है कि भारतीय कुश्ती पिछले कुछ वर्षों से विवादों, धरनों और प्रशासनिक संघर्षों के कारण भरोसे के संकट से गुजर रही है। इसलिए खिलाड़ियों की आशंकाओं को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।
गोंडा में लगातार आयोजन के पीछे दो समानांतर धाराएं दिखाई देती हैं:
व्यवस्थागत कारण — एक ही परिसर में बड़े स्तर की आवास और आयोजन सुविधा।
राजनीतिक और संगठनात्मक प्रभाव — बृजभूषण शरण सिंह के प्रभाव क्षेत्र में आयोजन होने से उठते सवाल।
यही वजह है कि यह मामला सिर्फ “स्टेडियम चयन” का नहीं, बल्कि भारतीय कुश्ती में पारदर्शिता और विश्वास का मुद्दा बन गया है।
