देशभर में जारी छात्र आंदोलन पर सचिन तेंदुलकर का बड़ा बयान: दिवंगत पिता को याद कर दिया भावुक संदेश

Sachin Tendulkar's major statement on the ongoing nationwide student protests: Shares an emotional message while remembering his late father.
 
सचिन तेंदुलकर
देश में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और हालिया विवादों को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच महान पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। युवाओं और छात्रों के समर्थन में एक भावुक संदेश साझा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मेहनत, ईमानदारी और काबिलियत ही किसी भी प्रगतिशील समाज की असली नींव होती है।

पिता की सीख को किया याद

सचिन तेंदुलकर ने अपने दिवंगत पिता प्रो. रमेश तेंदुलकर के जीवन मूल्यों को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक लंबा और विचारणीय संदेश पोस्ट किया। उन्होंने लिखा मेरे पिता एक प्रोफेसर थे और उन्होंने अनगिनत युवा छात्रों को मार्गदर्शन दिया। बचपन से ही उन्होंने मुझे एक बात गहराई से सिखाई थी—'असाधारण रूप से असफल हो जाना ठीक है, लेकिन कभी भी धोखे या बेईमानी का सहारा मत लेना।' जीवन में कभी शॉर्टकट मत अपनाओ।"

सचिन ने आगे कहा कि जो समाज केवल नतीजों पर ध्यान केंद्रित करता है और कड़ी मेहनत की अनदेखी करता है, वह युवाओं को गलत रास्ते (शॉर्टकट) पर चलने के लिए मजबूर करता है।


"कड़ी मेहनत का सम्मान होना बेहद ज़रूरी"

देशभर में जारी छात्रों के गुस्से और निराशा पर चिंता व्यक्त करते हुए मास्टर ब्लास्टर ने कहा कि जब छात्र रात-दिन पढ़ाई करने के बाद भी ठगा हुआ महसूस करते हैं, तो उनकी निराशा पूरी तरह वाजिब है।

उन्होंने कहा कि माता-पिता, शिक्षकों, प्रशासन और पूरे समाज की यह संयुक्त जिम्मेदारी है कि हम ऐसा माहौल तैयार करें जहाँ:

  • युवाओं के सपनों और ऊर्जा को सही दिशा मिले।

  • कड़ी मेहनत और ईमानदारी को बढ़ावा दिया जाए।

  • केवल योग्यता (Merit) के आधार पर ही सफलता तय हो।

सचिन तेंदुलकर ने विश्वास जताया कि जल्द ही इस समस्या का ऐसा स्थायी समाधान निकाला जाएगा जो देश के युवाओं और बच्चों के भविष्य को पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत बनाएगा। उन्होंने अपने संदेश का अंत "जय हिंद" के साथ किया।

पृष्ठभूमि: क्यों हो रहा है प्रदर्शन?

उल्लेखनीय है कि देश में परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांगों को लेकर विभिन्न छात्र संगठन दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे हैं। मानसून सत्र के दौरान शुरू हुए इस आंदोलन ने अब राजनीतिक और सामाजिक रूप से बड़ा आकार ले लिया है।

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