Seema Kaliramna CWG 2026 Bronze : मैदान पर थ्रो का कमाल, घर पर मातृत्व और पढ़ाई! 'PhD डॉक्टर' सीमा कालीरमन ने कॉमनवेल्थ गेम्स डेब्यू में जीता ब्रॉन्ज
Seema Kaliramna CWG 2026 Bronze: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के आठवें दिन भारतीय दल के खाते में देर रात एक और बड़ी सफलता दर्ज हुई। महिलाओं की डिस्कस थ्रो (Discus Throw) स्पर्धा में भारत की एथलीट सीमा कालीरमन ने अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों के डेब्यू में कांस्य पदक (Bronze Medal) जीतकर देश का नाम रोशन किया है।
सीमा की इस उपलब्धि के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है, जबकि एथलेटिक्स में यह भारत का 8वां मेडल रहा।
Congratulations to NCOE Patiala athlete Seema on winning the Bronze Medal in the Women's Discus Throw event at the Commonwealth Games.#Cheer4Bharat #CWG2026 pic.twitter.com/xVuj31sEmu
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) July 30, 2026
6 में से 4 प्रयास हुए फाउल, फिर भी 58.65 मीटर दूर फेंक जीता मेडल
ग्लासगो में आयोजित इस प्रतिस्पर्धा के फाइनल मुकाबले में सीमा के लिए राह आसान नहीं रही। 6 प्रयासों में से उनके 4 थ्रो 'फाउल' करार दिए गए, लेकिन दबाव के क्षणों में उन्होंने अपने जज्बे का परिचय दिया:
-
पहला थ्रो: फाउल
-
दूसरा थ्रो: 57.32 मीटर (इस थ्रो के साथ ही वे मेडल रेस में तीसरे स्थान पर पहुंचीं)
-
तीसरा थ्रो: 58.65 मीटर (यह उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो रहा, जिसने ब्रॉन्ज मेडल पक्का किया)
इसी इवेंट में भारत की एक अन्य एथलीट निधि रानी ने भी शानदार प्रदर्शन किया और 57.10 मीटर के थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहीं।
पति बने कोच, 11 महीने के बच्चे की माँ और PhD की डिग्री!
हरियाणा के भिवानी की रहने वाली सीमा की यह सफलता केवल मैदान तक सीमित नहीं है। उनके खेल और निजी जीवन की कहानी संघर्ष और प्रेरणा से भरी हुई है:
-
डिस्कस थ्रो ने जोड़ी राह: सीमा के पति रविंदर खुद जूनियर व सब-जूनियर स्तर पर नेशनल चैंपियन रह चुके हैं। चोट के कारण जब उनका अपना करियर थम गया, तो उन्होंने सीमा का हाथ थामा और उनके पति के साथ-साथ उनके पर्सनल कोच की भूमिका भी निभाई।
-
मातृत्व के बाद वापसी: चोट के ब्रेक के दौरान सीमा ने अपने बेटे को जन्म दिया। बेटे के महज 11 महीने का होने पर ही अपने ससुराल पक्ष के समर्थन और पति के प्रोत्साहन से उन्होंने वापस मैदान में ट्रेनिंग शुरू कर दी।
-
स्पोर्ट्स में PhD ('डॉक्टर' सीमा): कोरोना महामारी के समय जब खेल गतिविधियां रुकी हुई थीं, तब पति रविंदर की सलाह पर सीमा ने स्पोर्ट्स साइंस में अपनी पीएचडी (PhD) की पढ़ाई शुरू की और 'डॉक्टर सीमा' की उपाधि हासिल की।
मैदान के अंदर पदक जीतना, घर में पारिवारिक जिम्मेदारियां और मातृत्व निभाना और साथ ही उच्च शिक्षा में पीएचडी पूरी करना—सीमा कालीरमन का यह कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल देश की करोड़ों महिलाओं के लिए दृढ़ संकल्प और समर्पण का एक अद्भुत उदाहरण है।
