इंग्लैंड से हार के बाद श्रेयस अय्यर का फूटा गुस्सा, टीम की इस बड़ी कमजोरी को बताया हार की मुख्य वजह
परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालना होगा
मैच के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि इस सीरीज के नतीजे भले ही हमारे पक्ष में नहीं रहे, लेकिन टीम के युवा खिलाड़ियों को विदेशी सरजमीं पर बहुत कुछ सीखने को मिला है। अय्यर ने कहा इस दौरे पर हमें यहां के माहौल और पिच के व्यवहार को करीब से समझने का मौका मिला। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे महत्वपूर्ण यही है कि एक खिलाड़ी के तौर पर आप परिस्थितियों के हिसाब से खुद को कितनी जल्दी ढालते हैं। पहले मैच से लेकर अब तक यहां का मौसम और खेलने के हालात लगातार बदलते रहे। एक प्रोफेशनल क्रिकेटर होने के नाते हमें इस बदलाव से सीख लेनी होगी। अब यह जरूरी है कि पूरी टीम एक साथ बैठे और खुलकर इस बात पर चर्चा करे कि हम कहां बेहतर कर सकते थे।"
खराब फील्डिंग ने डुबोई लुटिया: छोड़े गए कैचों पर निकाला गुस्सा
मैच का विश्लेषण करते हुए श्रेयस अय्यर ने साफ तौर पर खराब फील्डिंग को इस करारी हार का सबसे बड़ा जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने फील्डर्स की मुस्तैदी पर सवाल उठाते हुए कहा:
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मैदान का आकार और तालमेल: जब आप अपने देश से बाहर दूसरे देशों में खेलने जाते हैं, तो वहां के मैदानों का आकार और बाउंड्री की लंबाई अलग होती है। खिलाड़ियों को उसी हिसाब से खुद को एडजस्ट करना पड़ता है, जिसमें हमारे खिलाड़ी नाकाम रहे।
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कैच ड्रॉप होना पड़ा भारी: पांचवें मैच की पिच बल्लेबाजी के लिए बेहद अनुकूल थी। हमारे गेंदबाजों के पास बल्लेबाजों को भ्रमित करने के मौके बन रहे थे, लेकिन फील्डर्स ने अहम मौकों पर कैच टपका दिए। अगर वे कैच पकड़ लिए जाते, तो इंग्लैंड को हम 220-225 रनों के भीतर रोक सकते थे, जो कि चेसेबल (पीछा करने योग्य) स्कोर होता। लेकिन बदकिस्मती से हमने मैच अपने हाथों से गंवा दिया।
बटलर और ब्रूक की तारीफ, अपनी बल्लेबाजी पर उठाए सवाल
श्रेयस अय्यर ने विरोधी टीम के बल्लेबाजों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड के कप्तान जोस बटलर ने बेहद आक्रामक और शानदार बल्लेबाजी की, और मिडिल ऑर्डर में हैरी ब्रूक ने उनका बखूबी साथ निभाया। इंग्लैंड के गेंदबाजों को अपने घरेलू मैदानों पर खेलने का लंबा अनुभव है, जिसका उन्होंने सटीक लाइन और लेंथ से फायदा उठाया।
अय्यर ने अंत में स्वीकार किया कि विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय पारी के दौरान लगातार अंतराल पर विकेट गिरते चले गए, जिससे टीम कभी मुकाबले में आ ही नहीं सकी। उन्होंने साफ किया कि यदि भविष्य में भारत को इस फॉर्मेट में दोबारा बादशाहत हासिल करनी है, तो फील्डिंग के स्तर को हर हाल में सुधारना होगा।
