विकासनगर अग्निकांड: राहत-ए-इंसानियत फाउंडेशन बना पीड़ितों का सहारा, 'ऑक्सीजन मैन' चाँद कुरैशी ने पेश की सेवा की मिसाल

Irregularities in the RTE Scheme: Ineligible Benefiting, Eligible Children Deprived
 
संकट के समय 'संजीवनी' बनी राहत सामग्री अग्निकांड में अपना आशियाना खो चुके परिवारों के लिए फाउंडेशन ने व्यापक सहायता योजना तैयार की। वितरण अभियान के मुख्य आकर्षण निम्नलिखित रहे:  राशन किट: प्रत्येक परिवार को एक महीने का संपूर्ण राशन प्रदान किया गया, जिसमें आटा, चावल, दालें, तेल, शक्कर और मसाले शामिल थे।  शिक्षा की निरंतरता: बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए स्कूल बैग, कॉपियां, पेंसिल बॉक्स और अन्य स्टेशनरी वितरित की गई।  तात्कालिक सहायता: गर्मी और संकट को देखते हुए पीने के शुद्ध पानी, लस्सी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की भी व्यवस्था की गई।  500 लोगों तक पहुँची मदद: चाँद कुरैशी का नेतृत्व फाउंडेशन के चेयरमैन चाँद कुरैशी के नेतृत्व में चली इस मुहिम ने लगभग 400 से 500 लोगों के जीवन में सीधे तौर पर सकारात्मक प्रभाव डाला। चाँद कुरैशी, जिन्हें उनके निस्वार्थ सेवा भाव के कारण क्षेत्र में गहरा सम्मान प्राप्त है, ने अपनी टीम के साथ मिलकर हर पीड़ित तक पहुँच सुनिश्चित की।  समाज सेवा का एक दशक: राहत-ए-इंसानियत फाउंडेशन पिछले 10 वर्षों से लगातार वंचितों और पीड़ितों की सेवा में समर्पित है।  कोविड काल के 'ऑक्सीजन मैन' की निरंतर सेवा बता दें कि चाँद कुरैशी का नाम समाज सेवा के क्षेत्र में नया नहीं है। कोविड-19 महामारी के दौरान, विशेषकर दूसरी लहर के समय, उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को मुफ्त ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराए थे। उनके इसी साहसिक कार्य के कारण जनता ने उन्हें “ऑक्सीजन मैन” के नाम से नवाजा था।  एक सकारात्मक संदेश: "साथ ही असली इंसानियत है" विकासनगर में फाउंडेशन द्वारा किया गया यह कार्य समाज के लिए एक बड़ा संदेश है। मुश्किल समय में संसाधनों से अधिक, साथ खड़े होने का साहस महत्वपूर्ण होता है। चाँद कुरैशी और उनकी टीम का यह जज्बा साबित करता है कि इंसानियत आज भी जीवित है।
विकासनगर। दुख की घड़ी में जब सब कुछ राख हो गया, तब 'राहत-ए-इंसानियत फाउंडेशन' ने उम्मीद की नई लौ जलाई है। विकासनगर क्षेत्र में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए फाउंडेशन की टीम ने धरातल पर उतरकर राहत अभियान चलाया। टीम ने न केवल सांत्वना दी, बल्कि सैकड़ों जरूरतमंदों तक जीवन रक्षक सामग्री भी पहुंचाई।

संकट के समय 'संजीवनी' बनी राहत सामग्री

अग्निकांड में अपना आशियाना खो चुके परिवारों के लिए फाउंडेशन ने व्यापक सहायता योजना तैयार की। वितरण अभियान के मुख्य आकर्षण निम्नलिखित रहे:

  • राशन किट: प्रत्येक परिवार को एक महीने का संपूर्ण राशन प्रदान किया गया, जिसमें आटा, चावल, दालें, तेल, शक्कर और मसाले शामिल थे।

  • शिक्षा की निरंतरता: बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए स्कूल बैग, कॉपियां, पेंसिल बॉक्स और अन्य स्टेशनरी वितरित की गई।

  • तात्कालिक सहायता: गर्मी और संकट को देखते हुए पीने के शुद्ध पानी, लस्सी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की भी व्यवस्था की गई।

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500 लोगों तक पहुँची मदद: चाँद कुरैशी का नेतृत्व

फाउंडेशन के चेयरमैन चाँद कुरैशी के नेतृत्व में चली इस मुहिम ने लगभग 400 से 500 लोगों के जीवन में सीधे तौर पर सकारात्मक प्रभाव डाला। चाँद कुरैशी, जिन्हें उनके निस्वार्थ सेवा भाव के कारण क्षेत्र में गहरा सम्मान प्राप्त है, ने अपनी टीम के साथ मिलकर हर पीड़ित तक पहुँच सुनिश्चित की।राहत-ए-इंसानियत फाउंडेशन पिछले 10 वर्षों से लगातार वंचितों और पीड़ितों की सेवा में समर्पित है।

कोविड काल के 'ऑक्सीजन मैन' की निरंतर सेवा

बता दें कि चाँद कुरैशी का नाम समाज सेवा के क्षेत्र में नया नहीं है। कोविड-19 महामारी के दौरान, विशेषकर दूसरी लहर के समय, उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को मुफ्त ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराए थे। उनके इसी साहसिक कार्य के कारण जनता ने उन्हें “ऑक्सीजन मैन” के नाम से नवाजा था।

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एक सकारात्मक संदेश: "साथ ही असली इंसानियत है"

विकासनगर में फाउंडेशन द्वारा किया गया यह कार्य समाज के लिए एक बड़ा संदेश है। मुश्किल समय में संसाधनों से अधिक, साथ खड़े होने का साहस महत्वपूर्ण होता है। चाँद कुरैशी और उनकी टीम का यह जज्बा साबित करता है कि इंसानियत आज भी जीवित है।

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