जी20 के अधिकांश देश 2022 में गंभीर जलवायु प्रभावों से प्रभावित हुए

 
Climate change
 

क्षेत्रवार नीति नहीं होने की वजह से समाधान में अनेक जटिलताएं पैदा होती हैं।

उन्‍होंने कहा कि अगर आज हम बांग्लादेश में चक्रवातों से निपटने की तैयारियों को देखते हैं तो जाहिर होता है कि सही दृष्टिकोण प्रदूषणकारी तत्‍वों के उत्‍सर्जन में कमी लाने और अनुकूलन के लिये उपयोगी है और वह काम भी करता है, लेकिन हम लगातार यह देख रहे हैं कि सिर्फ एक नीति काम नहीं करती है जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों के लिहाज से अलग-अलग हैं।

क्लाइमेट ट्रेंड्स की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि जी20 के अधिकांश देश 2022 में गंभीर जलवायु प्रभावों से प्रभावित हुए हैं। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को तूफान, सूखा, बाढ़ और गर्मी की लहरों के रूप में कई मिलियन डॉलर की मार झेलनी पड़ रही है।


 


असाधारण गर्मी और सूखे ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और फसलें बर्बाद हो गई हैं। बाढ़ ने हजारों लोगों की जान ले ली है और बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया है। वर्ष 2022 जलवायु प्रभावों के लिहाज से अब तक के सबसे क्रूर वर्षों में से एक रहा है।

चीन, भारत और अमेरिका जैसे प्रमुख वैश्विक खाद्य उत्पादक देश विशेष रूप से लंबे समय तक सूखे से प्रभावित हुए हैं, जिससे रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक खाद्य संकट बढ़ गया है।

रिपोर्ट में 2022 में घटित 14 चरम मौसमी घटनाओं का विवरण दिया गया है जो जलवायु वैज्ञानिकों द्वारा वर्षों से दी जा रही जोखिम सम्‍बन्‍धी चेतावनी को साफ तौर से दर्शाती हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2022 में हीटवेव के प्रभाव के कारण चीन में 70 दिनों तक चलने वाली लू से तापमान 40 डिग्री सेल्सियस (104 फ़ारेनहाइट) से ऊपर पहुंच गया, जिससे जलविद्युत संयंत्र बंद हो गए और औद्योगिक शहर चोंगकिंग में व्यवसायों को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

इस साल यूरोप ने कम से कम 500 वर्षों में अपने सबसे खराब सूखे का अनुभव किया। इस दौरान महाद्वीप का 17% हिस्सा अलर्ट की स्थिति में था। सूखे के कारण जंगल में आग लग गई। फसल घट गई और ऊर्जा उत्पादन बाधित हो गया। वैज्ञानिकों के अनुसार अमेरिका में 1,200 वर्षों का सबसे भीषण सूखा पड़ा है।

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2022 में बाढ़ के प्रभावों के लिहाज से देखें तो पाकिस्तान में भयंकर बाढ़ के कारण 1,500 से अधिक लोग मारे गए हैं और 33 मिलियन लोग विस्थापित हुए हैं। बाढ़ के कारण इस देश का एक तिहाई हिस्सा पानी में डूब गया है।

ऑस्ट्रेलिया में बाढ़ के कारण 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर के नुकसान का एक नया रिकॉर्ड बन गया जो देश में अब तक की सबसे महंगी प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। दक्षिण अफ्रीका में पूर्वी दक्षिण अफ्रीका के तट पर अप्रैल में दो दिनों की असाधारण वर्षा के कारण भयंकर बाढ़ आई, जिससे 40,000 से अधिक विस्थापित हुए। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में 12,000 से अधिक घर नष्ट हो गए और सड़कों, स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गये।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि जी20 देशों को अपने राष्ट्रीय उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य को बढ़ाकर इस दिशा में नेतृत्व करना चाहिए और दुनिया के तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री तक सीमित करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि रिकॉर्ड सूखे, आग और बाढ़ के बावजूद जलवायु परिवर्तन नियंत्रण की कार्रवाई सपाट थी और अगर जी20 देशों का एक तिहाई आज पानी के नीचे था, और कल भी हो सकता है, तो शायद उनके लिए उत्सर्जन में भारी कटौती पर सहमत होना ज्‍यादा आसान होगा।

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