AI Impact Summit: एआई की बढ़ती ताकत और पानी का संकट

AI Impact Summit: The Growing Power of AI and the Water Crisis
 
AI Impact Summi
नई दिल्ली के Bharat Mandapam में आयोजित AI Impact Summit में दुनिया भर के टेक लीडर्स ने एआई के प्रभाव और उसके उपयोग पर चर्चा की। जहां एक तरफ एआई काम को तेज और आसान बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसका पर्यावरण पर पड़ने वाला असर गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।

AI की प्यास बुझाने में इंसान रह जाएंगे प्यासे?

Google की 2024 एनवायरनमेंटल रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के डेटा सेंटर्स ने 2023 में करीब 6.1 बिलियन (6.1 अरब) गैलन साफ पानी का इस्तेमाल किया — जो 2022 के मुकाबले 17% ज्यादा है।गूगल अकेली कंपनी नहीं है; दुनिया की कई बड़ी टेक कंपनियां एआई डेटा सेंटर्स चला रही हैं। ऐसे में भविष्य में पानी की खपत और तेजी से बढ़ सकती है। सवाल यह है कि क्या एआई की प्यास बुझाते-बुझाते इंसान खुद प्यासा रह जाएगा?

पिछले साल जब OpenAI के ChatGPT में Ghibli-स्टाइल इमेज फीचर वायरल हुआ, तो सर्वर पर इतना लोड पड़ा कि भारी मात्रा में कूलिंग की जरूरत पड़ी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बढ़ते उपयोग से डेटा सर्वर गर्म होने लगे और कूलिंग के लिए बड़ी मात्रा में पानी खर्च हुआ।

आखिर डेटा सेंटर में इतना पानी क्यों लगता है?

एआई डेटा सेंटर्स में हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर और GPU लगे होते हैं, जो सामान्य कंप्यूटर से लाखों गुना ज्यादा हीट पैदा करते हैं। इस गर्मी को नियंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर कूलिंग सिस्टम लगाए जाते हैं, जिनमें पानी का उपयोग होता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि:

  • इस्तेमाल होने वाले पानी का करीब 80% भाप बनकर उड़ जाता है

  • भाप को दोबारा इकट्ठा कर पाना व्यावहारिक रूप से बेहद मुश्किल है

  • इसलिए यह पानी स्थायी रूप से सिस्टम से बाहर हो जाता है

साफ (RO) पानी ही क्यों?

डेटा सेंटर्स में अनट्रीटेड या सामान्य पानी इस्तेमाल नहीं किया जाता, क्योंकि उसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स होते हैं। ये मिनरल्स चिप्स और पाइपलाइन पर जमाव (स्केलिंग) बना सकते हैं, जिससे सिस्टम और ज्यादा गर्म हो सकता है। इसी वजह से RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) यानी अत्यधिक शुद्ध पानी का उपयोग किया जाता है। STP या रिसाइकल्ड पानी में भी मिनरल्स की मात्रा अधिक होती है, इसलिए उसका सीधा उपयोग मुश्किल होता है।

2028 तक 11 गुना बढ़ सकती है खपत

क्लाइमेट रिसर्च फर्म Morgan Stanley की एक स्टडी के मुताबिक, 2028 तक एआई डेटा सेंटर्स में पानी की खपत 11 गुना तक बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई डेटा सेंटर्स में रोजाना जितना पानी इस्तेमाल होता है, उससे कम से कम 50,000 लोगों की प्यास बुझाई जा सकती है।

आगे क्या?

एआई अभी अपने ट्रांजिशन फेज में है और इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है — खासकर एआई सर्च, जनरेटिव एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग में। भविष्य में टेक कंपनियों और सरकारों पर यह दबाव बढ़ेगा कि वे वैकल्पिक कूलिंग टेक्नोलॉजी अपनाएं (जैसे एयर-कूलिंग, लिक्विड इमर्शन) रिसाइकलिंग सिस्टम बेहतर बनाएं नवीकरणीय ऊर्जा और जल संरक्षण उपायों को प्राथमिकता दें

एआई केवल नौकरियों या टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पानी जैसे सबसे कीमती प्राकृतिक संसाधन से भी जुड़ा हुआ है। अगर अभी से संतुलन नहीं बनाया गया, तो तकनीकी तरक्की की कीमत पर्यावरण और इंसान दोनों को चुकानी पड़ सकती है।

Tags