कोयला खदानों के अंदर और उनके आसपास की जमीन को दूसरे प्रयोगों में लाने की योजना

 
Climate trends

 राज्यों के लिए न्याय संगत रूपांतरण से संबंधित नीतिगत निर्णयों को आकार देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यह बहुत जरूरी है कि भारत का कोयले को चलन से चरणबद्ध तरीके से बाहर करने का संकल्प मूर्त रूप ले। साथ ही साथ ऐसे नीतिगत कदम भी उठाए जाएं जो इस रूपांतरण से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले कामगारों और समुदायों का कल्याण सुनिश्चित कर सकें।"



यह रिपोर्ट अनेक स्तरों पर मौजूद चुनौतियों की एक पूरी श्रृंखला का खाका पेश करती है। इन चुनौतियों में अल्पकाल में (2030 तक) रोजगार के लिए कोयला क्षेत्र पर बढ़ती निर्भरता, छोटी और भूमिगत खदानों को बंद करना, कोयला खदानों को बंद करने की समय सीमा को लेकर जागरूकता की कमी, ऊर्जा रूपांतरण के लिए धन की कमी तथा रोजगार के विकल्पों का अभाव शामिल है। रिपोर्ट दीर्घकालिक परिदृश्य यानी वर्ष 2030 के बाद की चुनौतियों, जैसे कि सरकार की आमदनी में कमी, आर्थिक और मजबूरन प्रवासन विस्थापित श्रमिकों को रोजगार देने के अवसरों की कमी, संबंधित उद्योगों में रोजगार के अवसरों की कमी, गैर अनुबंधित कामगारों की सुरक्षा संबंधी व्यवस्था की कमी, वित्तीय सुरक्षा की कमी, कार्यकुशलता की कमी और व्यवहार संबंधी बदलावों में रुकावटों को रेखांकित करती है।
यह रिपोर्ट खदानों को बंद करने, कोयला खदानों के अंदर और उनके आसपास की जमीन को दूसरे प्रयोगों में लाने की योजना, क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं की मौजूदा स्थिति पर जिला स्तरीय रिपोर्टिंग, संभावनापूर्ण क्षेत्रों की पहचान, खास तौर पर वह क्षेत्र जहां कोयला खदानें पहले से ही मौजूद हैं, ऊर्जा रूपांतरण गतिविधियों पर उपकर लगाना, कारोबारों का विविधीकरण, कार्यकुशलता आधारित प्रशिक्षण, रोजगार उत्पन्न करने की योजनाओं को बढ़ावा इत्यादि से संबंधित दिशानिर्देशों को बेहतर बनाने का आह्वान करती है।
इस अध्ययन में एक व्यापक नीतिगत कार्ययोजना की जरूरत पर भी जोर दिया गया है, जिसके जरिए अध्ययन में की गई सिफारिशों और दिए गए सुझावों पर विचार किया जा सके।--

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