क्या आप होलिका दहन के पीछे का सच जानते हैं? अहंकार पर विश्वास की शक्तिशाली कहानी

 
होलिका दहन भारतीय संस्कृति में केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिक संदेश देने वाला पर्व है। यह अहंकार पर विश्वास और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, असुर राजा हिरण्यकशिपु अपने अहंकार में स्वयं को ईश्वर मान बैठा था। उसने अपने ही पुत्र प्रह्लाद को भगवान की भक्ति से रोकने के लिए अनेक यातनाएं दीं, लेकिन प्रह्लाद की भगवान विष्णु के प्रति अटूट आस्था डिगी नहीं।

हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था। अहंकारवश उसने प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का प्रयास किया, ताकि वह भस्म हो जाए। किंतु हुआ इसके विपरीत—होलिका स्वयं अग्नि में जलकर राख हो गई और प्रभु कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए।