क्या विधवा का श्रृंगार सच में धर्म के खिलाफ है? शास्त्र असल में क्या कहते हैं?

 
भारतीय समाज में विधवा स्त्रियों के लेकर सदियों से एक कठोर और अमानवीय सोच थोपी गई है. कई लोगों मानते हैं कि, विधवा औरत को हमेशा सफेद कपड़े पहनने चाहिए, गहने नहीं पहनने चाहिए, सौंदर्य प्रसाधन (Beauty product) का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, हंसना नहीं चाहिए, मानो पति के निधन के साथ उसका जीवन भी खत्म हो गया हो

लेकिन सवाल यह है कि, आखिर यह नियम आए कहां से?

कथावाचक शिवम साधक महाराज कहते हैं कि, किसी भी वेद, पुराण या शास्त्र में यह कहीं भी नहीं लिखा है कि, विधवा स्त्री को श्रृंगार नहीं करना चाहिए. तो फिर समाज ने यह क्रूर परंपरा क्यों बनाई?