नवरात्रि दिवस 5 माँ स्कंदमाता पूजा आशीर्वाद, महत्व और अनुष्ठान

 

नवरात्रि का पांचवां दिन: माँ स्कंदमाता की पूजा, महत्व और शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि 2026 | मार्च 2026

नवरात्रि के पांचवें दिन नवदुर्गा के पंचम स्वरूप माँ स्कंदमाताकी उपासना की जाती है। भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र 'कार्तिकेय' का एक नाम 'स्कंद' भी है, और उनकी माता होने के कारण देवी के इस स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है। ममतामयी माँ स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों को सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

माँ स्कंदमाता का स्वरूप

माँ स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं। वे अपने दो हाथों में कमल का फूल धारण करती हैं, एक हाथ वरमुद्रा में होता है और एक हाथ से वे अपनी गोद में बैठे बाल कार्तिकेय (स्कंद) को संभाले हुए हैं। माँ का वाहन सिंहहै, लेकिन वे स्वयं कमल के आसनपर विराजमान रहती हैं, इसलिए उन्हें 'पद्मासना देवी'भी कहा जाता है।

पूजा का महत्व

  • संतान सुख:ऐसी मान्यता है कि जो भक्त नि:संतान हैं, उन्हें स्कंदमाता की पूजा से उत्तम संतान की प्राप्ति होती है।

  • मोक्ष का मार्ग:माँ की उपासना से साधक के लिए मोक्ष के द्वार खुलते हैं और उसे परम शांति का अनुभव होता है।

  • ज्ञान की प्राप्ति:देवी के इस रूप की पूजा से बुद्धि तेज होती है और अज्ञानता का अंधकार दूर होता है।

माँ स्कंदमाता पूजा विधि (अनुष्ठान)

  1. स्नान और ध्यान:सुबह जल्दी स्नान कर साफ वस्त्र (संभव हो तो पीले रंग के) पहनें।

  2. कलश पूजन:सबसे पहले कलश और उसमें स्थापित देवी-देवताओं का पूजन करें।

  3. आह्वान:माँ स्कंदमाता का ध्यान करें और उन्हें अक्षत, धूप, दीप व गंध अर्पित करें।

  4. प्रिय रंग और भोग:माँ को पीला रंगअत्यंत प्रिय है। उन्हें पीले फूल अर्पित करें और भोग में केलेका नैवेद्य लगाएं।

  5. आरती:अंत में कपूर जलाकर माँ की आरती करें और भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।