रंगधारी प्रसाद रहस्य समझाया गया विवाहित बेटियों को क्यों नहीं दिया जाता प्रसाद

 
रंगधारी प्रसाद (या रंगाधारी) पूर्वोत्तर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में घर और खेत की रक्षा करने वाली एक अच्छी आत्मा (पिंडी) को अर्पित किया जाता है। विवाहित बेटियों को यह प्रसाद नहीं दिया जाता क्योंकि रंगधारी को केवल उसी घर और वंश का संरक्षक माना जाता है, जिससे वे जुड़ी थीं। विवाह के बाद, बेटी का गोत्र और वंश बदल जाता है, इसलिए वह इस विशिष्ट संरक्षण के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो जाती है
रंगधारी कोई डरावना भूत नहीं, बल्कि घर के मुखिया की तरह मानी जाने वाली एक अच्छी आत्मा है जो मुसीबत के समय, फसल की सुरक्षा या मवेशियों के बीमार होने पर गोसाई घर (पूजा घर) में पूजी जाती है।