Shani Pradosh Vrat:आज हैशनि प्रदोष,शनि प्रदोष व्रत का महत्व,पूजा विधि,जाने क्यों किया जाता है ये व्रत

 
Shani Pradosh Vrat:आज हैशनि प्रदोष,शनि प्रदोष व्रत का महत्व,पूजा विधि,जाने क्यों किया जाता है ये व्रत

Shani Pradosh Vrat :शनि प्रदोष में खास तौर पर भगवान को तिल का भोग अर्पित करना चाहिए साथ ही गरीबों को भी भोग खिलाना चाहिए।

डेस्क-Shani Pradosh Vrat इस बार 06 अक्टूबर 2018 को शनि प्रदोष व्रत पड़ रहा है। शनिदेव नवग्रहों में से एक हैं। शास्त्रों में शनि के प्रकोप से बचने के लिये शनि प्रदोष व्रत बताया गया है।

जिस प्रकार प्रत्येक मास की एकादशी पुण्य फलदायी बतायी जाती है उसी प्रकार हर के कृष्ण व शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि भी व्रत उपवास के लिये काफी शुभ होती है। एकादशी में जहां भगवान विष्णु की पूजा की जाती है वहीं त्रयोदशी तिथि जिसे प्रदोष व्रत भी कहा जाता है में भगवान शिवशंकर की आराधना की जाती है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत का पालन करने से सभी प्रकार के दोषों का निवारण हो सकता है। प्रदोष व्रत प्रत्येक मास की त्रयोदशी को रखा जाता है लेकिन हर त्रयोदशी की पूजा वार के अनुसार की जाती है। प्रत्येक वार की व्रत कथा भी भिन्न है।

आइये जानते हैं Shani Pradosh Vrat जो शनिवार के दिन रखे जाने वाले प्रदोष व्रत यानि शनि त्रयोदशी के महत्व, व्रत कथा व पूजा विधि के बारे में

  • सही विधि-विधान से किये गए शनि प्रदोष का हितकारी फल मिलता है।
  • इस व्रत को करने से न सिर्फ शनिदेव के कारण होने वाली परेशानियां दूर होती हैं, बल्कि उनका आशीर्वाद भी मिलता है।
  • शनि प्रदोष के दिन जो व्यक्ति शनि से संबंधित वस्तुओं जैसे लोहा, तेल, तिल, काली उड़द, कोयला और कम्बल आदि का दान करता है तथा व्रत रखता है, शनिदेव उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं।
  • प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की जाती है।
  • प्रदोष व्रत भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा के लिए विशेष तिथि है।
  • इस तिथि में व्रत व पूजन का विशेष महत्व होता है और ऐसी माना जाता है कि जो भी व्यक्ति इस तिथि में पूजन करता है।
  • उसको मां पार्वती व भगवान शंकर की कृपा मिलती है।
  • इस बार प्रदोष व्रत शनिवार को पडने के कारण शिव और माता पार्वती के साथ ही शनिदेव की भी कृपा प्राप्त होगी। प्रदोष व्रत त्रयोदशी क दिन रखा जाता है।
  • ज्योतिषों के अनुसार इस बार का प्रदोष व्रत पुण्यकारी है।
  • प्रदोष व्रत का पालन सफलता, शान्ति और समस्त इच्छाओं की पूर्ति करने वाला है।
  • कहते हैं कि इस दिन शिव के किसी भी रूप का दर्शन सारे अज्ञान का नाश कर देता है और साधक को शिव की कृपा का भागी बनाता है।

पूजा का महत्व

  • शनि प्रदोष में खास तौर पर भगवान को तिल का भोग अर्पित करना चाहिए साथ ही गरीबों को भी भोग खिलाना चाहिए।
  • काले छाते व जूते का दान करना चाहिए।
  • इससे राशि में चंद्र देव से होने वाले सभी दोषों से शनि की कृपा से मुक्ति मिलती है।
  • इस व्रत में दो समय भगवान शिव की पूजा की जाती है, एक बार सुबह और एक बार शाम को सूर्यास्त के बाद, यानी कि रात्रि के प्रथम पहर में।
  • शाम की इस पूजा का बहुत महत्व है क्योंकि सूर्यास्त के पश्चात रात्रि के आने से पूर्व का समय प्रदोष काल कहलाता है।

कलयुग में प्रदोष व्रत का है बहुत महत्व

  • शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत को रखने से व्यक्ति को दो गायों के दान देने के समान पुण्य मिलता है।
  • कलयुग में प्रदोष व्रत का अतुल्य महत्व है |
  • इस दिन व्रत रखने और शिव की आराधना करने पर ईश्वर की कृपा हमेशा बनी रहती है जिससे व्रती को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • इस व्रत को करने से व्रत करने वाले व्यक्ति के साथ ही उसका पूरा परिवार हमेशा निरोग रहता है और सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।
  • गुरु प्रदोष व्रत जहां शत्रुओं के विनाश के लिए किया जाता है।
  • वहीं, जिनको संतान प्राप्ति की कामना हो, उन्हें शनिवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत करना चाहिए।

पूजा विधि

  • शनि प्रदोष व्रत में साधक को संध्या-काल में भगवान का भजन-पूजन करना चाहिए और शिवलिंग का जल और बिल्व की पत्तियों से अभिषेक करना चाहिए।
  • साथ ही इस दिन महामृत्युंजय-मंत्र के जाप का भी विधान है।
  • इस दिन प्रदोष व्रत कथा का पाठ करना चाहिए और पूजा के बाद भभूत को मस्तक पर लगाना चाहिए।
  • शास्त्रों के अनुसार जो साधक इस तरह शनि प्रदोष व्रत का पालन करता है, उसके सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं और सम्पूर्ण इच्छाएँ पूरी होती हैं।
  • शनि प्रदोष व्रत के दिन व्रती को प्रात:काल उठकर नित्य क्रम से निवृत हो स्नान कर शिव जी का पूजन करना चाहिये।
  • पूरे दिन मन ही मन "ऊँ नम: शिवाय " का जप करें। पूरे दिन निराहार रहें।
  • त्रयोदशी के दिन प्रदोष काल में यानी सुर्यास्त से तीन घड़ी पूर्व, शिव जी का पूजन करना चाहिये।
  • शनि प्रदोष व्रत की पूजा शाम 4:30 बजे से लेकर शाम 7:00 बजे के बीच की जाती है।
  • व्रती को चाहिये की शाम को दुबारा स्नान कर स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण कर लें ।
  • पूजा स्थल अथवा पूजा गृह को शुद्ध कर लें।
  • यदि व्रती चाहे तो शिव मंदिर में भी जा कर पूजा कर सकते हैं।
  • पांच रंगों से रंगोली बनाकर मंडप तैयार करें। पूजन की सभी सामग्री एकत्रित कर लें।
  • कलश अथवा लोटे में शुद्ध जल भर लें।
  • कुश के आसन पर बैठ कर शिव जी की पूजा विधि-विधान से करें।
  • "ऊं नम: शिवाय " कहते हुए शिव जी को जल अर्पित करें।
  • इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर शिव जी का ध्यान करें।

ध्यान का स्वरूप

  • करोड़ों चंद्रमा के समान कांतिवान, त्रिनेत्रधारी, मस्तक पर चंद्रमा का आभूषण धारण करने वाले पिंगलवर्ण के जटाजूटधारी, नीले कण्ठ तथा अनेक रुद्राक्ष मालाओं से सुशोभित, वरदहस्त, त्रिशूलधारी, नागों के कुण्डल पहने, व्याघ्र चर्म धारण किये हुए, रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजमान शिव जी हमारे सारे कष्टों को दूर कर सुख समृद्धि प्रदान करें।
  • ध्यान के बाद, शनि प्रदोष व्रत की कथा सुने अथवा सुनायें। कथा समाप्ति के बाद हवन सामग्री मिलाकर 11 या 21 या 108 बार "ऊँ ह्रीं क्लीं नम: शिवाय स्वाहा " मंत्र से आहुति दें ।
  • उसके बाद शिव जी की आरती करें। उपस्थित जनों को आरती दें।
  • सभी को प्रसाद वितरित करें । उसके बाद भोजन करें ।
  • भोजन में केवल मीठी सामग्रियों का उपयोग करें।
  • यदि आप व्रत करने में सक्षम नहीं हैं तो शनि प्रदोष व्रत कथा अवश्य पढ़ें और भगवान शिव पर देसी घी का दीपक और शनि देव पर सरसों के तेल का दीपक अर्पित करें।
  • इससे भी अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है और भगवान शिव व शनि देव की कृपा भी प्राप्त होती है।

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शनि प्रदोष के दिन निम्न उपाय करने से आप पर शनि की कृपा बनी रहेगी

  • शनि प्रदोष व्रत शनि के अशुभ प्रभाव से बचाव के लिए उत्तम होता है। शनि प्रदोष व्रत करने वाले पर शनिदेव की असीम कृपा होती है।
  • व्रत करने वाले को इस दिन प्रातःकाल भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए और इसके बाद शनि देव की पूजा। संध्या काल में सूर्यास्त के बाद रात होने से पहले गोधूली के समय शिव और शनि की पूजा करने से व्रत पूरा होता है।
  • शनि प्रदोष व्रत के दिन ग्यारह बार दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करने से शनि के अशुभ प्रभाव के कारण जीवन में आ रही परेशानी में कमी आती है।
  • शनि प्रदोष व्रत करने से शनि देव का प्रकोप शान्त हो जाता है।
  • जिन लोगों पर साढ़ेसाती और ढैया का प्रभाव हो, उनके लिए शनि प्रदोष व्रत करना विशेष हितकारी माना गया है।
  • इस दिन विधि-विधान से यह व्रत करना शनिदेव की कृपा प्राप्त करने का एक शास्त्रसम्मत आसान उपाय है।
  • ऐसा करने से न सिर्फ़ शनि के कारण होने वाली परेशानियाँ दूर होती हैं, बल्कि शनिदेव का आशीर्वाद भी मिलता है जिससे सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
  • शनि प्रदोष वाले दिन जो जातक शनि की वस्तुओं जैसे लोहा, तैल, तिल, काली उड़द, कोयला और कम्बल आदि का दान करता है,
  • शनि-मंदिर में जाकर तैल का दिया जलाता है तथा उपवास करता है, शनिदेव उससे प्रसन्न होकर उसके सारे दुःखों को हर लेते हैं।
  • शास्त्रों में वर्णित है कि संतान की कामना रखने वाले दम्पत्ति को शनि प्रदोष व्रत अवश्य रखना चाहिए।

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