What is the story of Rahu and Ketu? राहू और केतु कौन थे और इनकी पूजा क्यों की जाती है जानिए 

What is the story of Rahu and Ketu? राहू और केतु कौन थे और इनकी पूजा क्यों की जाती है जानिए 
क्या आपको पता है की राहू और केतु कौन थे इन सभी कारणों से राहु और केतु को हिंदू धर्म में देवताओं की तरह पूजा जाता है। राहु और केतु की पूजा करने से व्यक्ति को ज्ञान, शक्ति और सफलता प्राप्त होती है। राहु और केतु की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाले कष्ट भी दूर होते हैं।
 

राहु और केतु की कहानी क्या है?

समुद्र मंथन के समय देवताओं और असुरों ने मिलकर अमृत प्राप्त करने का प्रयास किया। अमृत एक दिव्य द्रव था जो अमरता प्रदान करता था। असुरों ने अमृत को चुराने की कोशिश की, लेकिन देवताओं ने उन्हें रोक दिया। असुरों के नेता स्वरभानु ने अमृत की कुछ बूंदें पी लीं। भगवान विष्णु ने उसे मारने के लिए अपना सुदर्शन चक्र फेंका। चक्र ने स्वरभानु के सिर को उसके धड़ से अलग कर दिया।

परंतु तब तक स्वरभानु अमृत की कुछ बूंदें पी चुका था, इसलिए उसका सिर अमर हो गया। उसका सिर राहु और धड़ केतु बन गया। राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा के परिक्रमा पथों के आपस में काटने के दो बिन्दुओं के द्योतक हैं। पृथ्वी के सापेक्ष एक दूसरे के उल्टी दिशा में (180  डिग्री पर) स्थित रहते हैं। सूर्य और चंद्र के ब्रह्मांड में अपने-अपने पथ पर चलने के अनुसार ही राहु और केतु की स्थिति भी बदलती रहती है। तभी, पूर्णिमा के समय यदि चाँद राहू (अथवा केतु) बिंदु पर भी रहे तो पृथ्वी की छाया पड़ने से चंद्र ग्रहण लगता है। ज्योतिष में राहु और केतु को अशुभ ग्रह माना जाता है। इनके कारण व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि यदि राहु और केतु कुंडली में शुभ स्थान पर हों तो व्यक्ति को लाभ भी मिल सकता है।

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केतु को भगवान विष्णु की बुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है। ये दोनों ग्रह सूर्य और चंद्र की परिक्रमा करते हैं, लेकिन कभी भी इन ग्रहों के सामने नहीं आते हैं। इसलिए इन्हें छाया ग्रह कहा जाता है। ज्योतिष में छाया ग्रहों को रहस्य, अज्ञात और परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है।राहु और केतु को हिंदू पौराणिक कथाओं में भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। 

राहु को एक राक्षस माना जाता है, जिसने सूर्य और चंद्र को निगल लिया था। केतु को राहु का धड़ माना जाता है। इन दोनों ग्रहों को ज्ञान, शक्ति और सफलता का प्रतीक भी माना जाता है। राहु और केतु को हिंदू धर्म में कई देवी-देवताओं से जोड़ा गया है। राहु को भगवान शिव का रूप माना जाता है, जबकि केतु को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। राहु को भगवान शिव की शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जबकि केतु को भगवान विष्णु की बुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

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राहु और केतु की पूजा करने के कुछ प्रमुख उपाय 

1. राहु और केतु की पूजा करने के लिए सबसे अच्छा दिन शनिवार है। शनिवार के दिन राहु और केतु की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाले कष्ट दूर होते हैं।

2. राहु और केतु की पूजा करने के लिए भगवान शिव की पूजा करना भी बहुत लाभकारी होता है। भगवान शिव की पूजा करने से राहु और केतु का अशुभ प्रभाव कम होता है।

3. राहु और केतु की पूजा करने के लिए केतु के बीज मंत्र का जाप करना भी बहुत लाभकारी होता है। केतु के बीज मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को ज्ञान और सफलता प्राप्त होती है।

4 .राहु और केतु की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में आने वाली कई समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। राहु और केतु की पूजा करने से व्यक्ति का जीवन सुखमय और समृद्ध बन सकता है।

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