प्रदोष व्रत क्या है प्रदोष व्रत करने से क्या लाभ होता है?

प्रदोष व्रत क्या है प्रदोष व्रत करने से क्या लाभ होता है?
प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह महीने में दो बार, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। 'प्रदोष' का अर्थ है 'शाम' और इस व्रत में भक्त भगवान शिव की पूजा शाम के समय करते हैं।

प्रदोष व्रत क्यों किया जाता है

भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए : मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
पापों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए : यह व्रत पापों से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी किया जाता है।
ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए : प्रदोष व्रत का विशेष महत्व ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए भी है।
विभिन्न मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए : विभिन्न मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी प्रदोष व्रत रखा जाता है, जैसे कि विवाह, संतान प्राप्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदि।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

सुबह स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें। पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से भगवान शिव का अभिषेक करें। बेल पत्र, धतूरा, भांग, फल, फूल, आदि अर्पित करें। शिव चालीसा, आरती, आदि का पाठ करें। शाम को प्रदोष काल में दीप प्रज्वलित करें और भगवान शिव की आरती करें। व्रत का पारण अगले दिन सुबह स्नान करने के बाद करें।

प्रदोष व्रत के नियम

1. इस दिन व्रत रखें और सात्विक भोजन करें।
2. मांस, मदिरा, और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
3. ब्रह्मचर्य का पालन करें।
4. क्रोध, लोभ, और अन्य नकारात्मक भावनाओं से दूर रहें।
5. दान-पुण्य करें।

प्रदोष व्रत के लाभ 

1. भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
2. पापों से मुक्ति मिलती है।
3. आध्यात्मिक उन्नति होती है।
4. ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
5 . मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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